हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
पृष्ठ 122, कुल 258 में से
संदर्भ में पढ़ें३६ | हम्मीररासो
तिहूँ काल हेरै लखै नाहिं भाँनं ॥१९९॥ रमै कोकिला कीर नच्चै मयूरं । कहैं बैन मानो बजै कामँतूरं ॥ बहै सीत मन्दं सुगंधं पवन्नं । करै काम उद्दीपनं देखि बन्नं ॥२००॥ सुरं^१ सुंदरं पंकजं बन्न फुल्ले । करैं गुंज भारी भ्रमै भ्रमर मुल्ले ॥ चहूँ ओर कुमोदनी चारु फुल्ली^२ । महा मोद सौं भार आनंद झुल्ली ॥२०१॥ किते जीव संमूह देखंत भज्जैं । मृगं व्याघ्र चीते रिछं जत्र गज्जैं^३ ॥ कहूँ कौलपुंजं कहूँ लीलगाहं । कहूँ चीतलं पांडुलं^४ ब्याघ्र नाहं ॥२०२॥ कहूं भिल्ल बंके^५ बसैं ताङस्थाँनं^६ । भखैं सिंह स्यार ससाझोन पाँनं ॥ करै सिंह गुंजार भारी भयाँनं । सुने प्राँनहारी डरैं जीव हाँनं ॥२०३॥ तहाँ साह की सेन किन्हौं प्रबेसं । तजे खाँन^७ पाँनं लए जो असेसं ॥ करैं बीर जेते सु केते उपावं । हनैं जीव जे साहि को बाज^८ पावं^९ ॥२०४॥ तहाँ साह कै यूँ भए जाय डेरा । चहूँ ओर को खाँन केते अनेरा ॥
पाद-टिप्पणी: १ सरं सुन्दरं पंकजं पुंज । २ फूली । ३ मृगं भार चीते वृकंजत्र गज्जैं । ४ पाडलं । ५ भील बाँके । ६ तास स्थानं । ७ जाँन । ८ बाच । ९ उपायं, जपायं (अंत्यानुप्रास) । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri