भारतकोश
हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

पृष्ठ 123, कुल 258 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 123

हम्मीररासो ३७ कहूँ¹ बीन बादित्र बाजंत ऐसी। सुने राग मोहं² मृगं माल बैसी ॥२०५॥ करैं गान ताँनं पसू पच्छि मोहैं। सुनै जीव आवंत³ जानैं न को हैं॥ सुने बीन पब्बीन⁴ सुर नाय रागैं। रहे मोहि कै माल डारे न भागे ॥२०६॥ कहूँ राग ऐसो करैं मेघ आवैं। तबै साह ताको बड़ी मौज चावैं ॥ असी भाँति आखेट कै रंग भीनो। निसा घौस जातंन काहू न चीनो ॥२०७॥ तिहीं ठौर बित्यौ सुसारौ बसंतं। रमै पातसाहं मनौ र्तिकंतं ॥ तिहीं ठौर ग्रीखम्म किन्नौ प्रबेसँ। महा संकुलं बृक्ष राजं सुदेसं ॥२०८॥ तहाँ तेज भाँनं न जाँनं न जाँनं। तिहीं हेत साहं रहे तास थानं⁵ ॥ समौ एक ऐसो तहाँ रौद्र आयौ। महा पौन प्रचंड औ मेघ छायौ ॥२०९॥ कहूँ ओर पतसाह खेलैं सिकारं। करैं केलि जेती जलं बाल लारं* ॥ भयौ अंधकारं महाघोर ऐनं। गई सुद्धि सुझै नहीं अप्प⁶ नैनं ॥२१०॥ १ बहू। २ मोहे। ३ आनंद। ४ पर्वीन। ५ तिहीं तेज भाँनंन जाँनं नं जातं। तिहीं हेत साहं रहे संक वातं। ६ आप। *लार (लाल)=जो क्रीड़ा में अन्यों के पूर्व विजय प्राप्त करती हो। CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri