हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
पृष्ठ 124, कुल 258 में से
संदर्भ में पढ़ें३८ हम्मीररासो फुरथ्यौ¹ साह को सत्थ भोजत्थ तत्थं । भयौ घोर अंधार सुझै न हत्थं ॥ तजी बालकीड़ा जलं त्यागि भग्गी । जहीं ओर दौरी भयौ मुख अग्गी ॥२११॥ किहूँ ओर दासी किहूँ ओर खोजा* । कहूँ ओर हुरमैं कहूँ ओर कोजा ॥ जसो होनहारं बन्यौ आय जैसो । करो लाख कोऊ टरै नाहिं तैसो ॥२१२॥ लिखे लेख जो नाहिं मिट्टै सुकोई । यही बात निश्चै सुनो सर्व सोई ॥ सरं त्यागि चल्ली सुहुरमैं सुभीत । कँपै गात ताको रह्यौ व्यापि सीतं ॥२१३॥ तिहीं ठौर महिमा मिले सेख आई । महा साहसी सूर उद्धारताई ॥ निजं धर्म साधै तजै नाहिं राचं । कहै जो कछू² तो निवाहंत बाचं ॥२१४॥ मिली बाल ताकौं कही दीन बाँनी । समै³ बाम सेखं मनौं⁴ आप जानी ॥ डरो ना कहो आप हौ कौन कोई । कहूँ जो उढ़ावो यहाँ बैठि मोही ॥२१५॥ तवै बाजि तैं सेख भू पै जुआयौ । कछू वस्त्र हो अंग ताको उढ़ायौ ॥२१६॥ दोहरा छंद महिमा उतरे बाजि तैं, दियौ वस्त्र तिहिँ हत्थ । १ फुत्र्यौ । २ कहूँ । ३ उमै । ४ मनं । +खोजा=सेवक । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri