हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
DevanagariHindipublished258 पृष्ठ
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४८ हम्मीररासो कट्टन गरदन जोग तू, कीनौ १ कुविध २ खरान । को रक्खै ३ या भूमि पर, रक्खि ४ करै को जवान ॥२७२॥ छप्पय छंद यह महि मँडल जितो, आँन मेरी सब मांनैं। खूनी रक्खै कौन, कोउ ऐसा तू जानै ॥ हम तैं बली बताय, ओट जाकी तू तकै। बचै न काहू ठौर, एक बिन गए न मक्कै ॥ कर जोरि सेख इम उच्चरै, बली एक साहिब गिनूँ। निर्वीज धरा ५ कबहुँ न है, ६ मैं हमीर स्रवनन सुनूँ ७ ॥२७३॥ तब सुसेख सिर नाय, रजा हजरति जो पाऊँ । जौ न गिनै पतिसाह, सर्न मैं ताकी ८ जाऊँ ॥ तुमहिं न नाऊँ सोस, नहिंन फिरि दिल्लिय आऊँ । जुद्ध जुरे नहिं टरौं, हत्थ तुम कौ जु दिखाऊँ ॥ यह कहत सेख सल्लम किय, तबहिं चला चलचित्त भुब । निज धाम आय अप अनुज सों, बिबर बिबर बातें जु हुब ॥२७४॥ छंद पद्धरी आए जु सेख घर तब सरोष । जिय जान्यौ अपनो सकल दोष ॥ मिलिय ९ जु मीर गबरू सुधाय । चलचित्त देखि तिहिं पूछि १० जाय ॥२७५॥ किहिँ हेतु आज चिंतत सुभाय । किहिँ कियव वैर सो मुहिँ ११ बताय ॥ तिहिँ मारि करूँ ततकाल टूक १२ ।
१ किन्नौ । २ कुबदि । ३ राखै । ४ राखि । ५ भुंमि । ६ हैं । ७ गिन्यौ, सुन्यौ अंत्यानुप्रास । ८ जाकी । ६ मिल्ली । १० पुच्छि । ११ मो । १२ दुक्क । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri