हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
पृष्ठ 136, कुल 258 में से
संदर्भ में पढ़ें५० हम्मीररासो बज्जिव निसाँन गज्जिव सु ताँम ॥ मग चलत करत मृगया अनेक । मिलि चलिय१ सकल बर बीर एक२ ॥२८२॥ जिहिं मिलै राव राजा सु जाय । पतिसाहू बैर सुनि रहै चाय ॥ चहुँ चक्क फिरयौ महिमा सुधीर । नहिं३ कह्यौ रहन काहू सुबीर ॥२८३॥ द्वै४ दीन सेख देखे सुझारि । बिन राव दसौँ दिसि फिरिव हारि ॥ तब तक्कि५ सेख हम्मीर राव । सोइ आइ सरन परसे जु पाव ॥२८४॥ दोहरा छंद गढ़ बंका६ वंको सुधर, बंका६ राव हमीर । लखि प्रतीति मन महँ७ भइय, हर्षे महिमा मीर ॥२८५॥ देखि जलासय बिटप बहु, उतरि सुडेरा कीन८ । हय गय बंधे तरुन तर, खाँन पाँन बिधि लीन९ ॥२८६॥ डेरा ड्यौढ़ी करि खरे, करी बिछायती बेस । करि१० मसलति कौँ सलि जुरी, सब भर सरस सुदेस ॥२८७॥ मंत्री मंत्र सुपूच्छि११ तब, इक चर लीन सु बोलि । जाहु राव के पास तुम, कहो बात सब खोलि१२ ॥२८८॥ प्रथम सलाँम कहो जु तुम, बिरत१३ कहो सु बिसेष । हुकम होय जो मिलन कौं, तो हजूर है सेख ॥२८६॥ इतने मैं जानी परै, पन भ्रम प्रीति प्रतीति । १ चलै । २ केक । ३ नन कह्यौ । ४ द्वै, दोउ दोन, दोय । ५ तके । ६ बंको । ७ जिय मैं । ८ किन्न । ६ लिन्न । १० करी कचहरी आप तत्र । ११ पुच्छि । १२ बुल्लि, खुल्लि । १३ वृत्त, वृत्तांत । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri