हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहर्ष सोक यहिँ गति लख्यौ, तुम जानत सब रीति ॥२६०॥ तब सु दूत गय राव पहँ, करी खबरि दरबाँन । बोलि हजूरि सुदूत कौ, पूछत कुसल सुजाँन ॥२९१॥ सकल बात सुनि दूत मुख, हर्ष राव बहु कीन१ । तबहिं उलटि पठयौ सु वह, सेख बुलाय सुलीन२ ॥२९२॥ नाराच छंद चल्यौ जु सेख राव पहँ बनाय साज कीनयं३ । तुरंग पंच नाग एक साज साजि लीनयं४ ॥ कमाँन दोय टंकनो सु देस मुल्लताँन की । कृपाँन एक५ बेस देस पालकी सुजाँन की ॥२६३॥ लिये सु दोय बज्र लाल एक५ मुक्त मालयं । कही जु एक५ दोय बाज स्वाँन दोय पालयं ॥ सवार एक आपही सबै 'पयाद चल्लियं । रहे तनक्क पौरि जाय फेरि अग्ग हल्लियं ॥२६४॥ सुबेतहार अग्ग६ जाय राव कौ सुनाइयं । हमीर राव बेगि आय७ रावतं खँदाइयं ॥ चले लिवाय सेख कौ जहाँ जु राव बट्टियं । सभा समेत राव देखि सेख कौ सु उठ्ठियं ॥२९५॥ मिले उभै समाज सौं कुसल्ल छेम पुच्छियं । परस्सि पानि पाव सेख हाथ८ जोरि सुच्छियं ॥ करी जुअग्ग सेख भेंट बुल्लियौ सु बाचयं । सरन्नि राव राखि९ राखि मैं सरन्नि साचयं ॥२६६॥ फिरचौ सु मैं सु दीन दोय खाँन जाँति सब्वयं । जितेक राज रावताय छत्र जाति सब्वयं ॥
१ किन्न । २ लिन्न । ३ किन्नयं । ४ तुरंग पंच नाग इक्क साज सज्जि लिन्नयं । ५ इक्क । ६ अग्र । ७ आप । ८ हत्थ । ६ रक्खि रक्खि ।