हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५२ हम्मीररासो दिसा दसौँ जितेक भूप और बीर बंक जे । रहो कह्यौ सु कौन हू रहूँ तहाँ सुधीर जे १ ॥२९७॥ हँसे हमीर राव बात सेख की सुनंतही । कहा अलावदीन, पातसाह, सोभनंतही ॥ रहो यहाँ अभै सदा हमीर राव यों कहै । तजूँ ज तोहिं प्राण साथि और बात यों २ कहै ॥२९८॥ चौपाई छंद राव हमीर नजरि सब रक्खिय । बचन सेख कौ यहि बिधि भक्खिय ॥ तन धन गढ़ घर ए सब जावैँ । पै महिमा पतिसाह न पावैँ ॥२९९॥ कहै सेख प्रण समुझि सु किज्जिय ३ । मेरी प्रथम अर्ज सुनि लिज्जिय ४ ॥ दसों दिसा मैं मैं फिरि आयव । जिते खाँन सुलतान सु गायव ॥३००॥ गजा राँन. राव जितने जग । दीन होय देखे ५ सु अगम मग ॥ बाँध तेग साहस करि कोई ६ । तजै लोभ जीवन को सोई ७ ॥३०१॥ यह जिय जानि बास मुहिं दीजे ८ । सेख राखि ९ सरनै जस लीजे १० ॥ इतनी धरा सेष सिर होई । कहै साहि रक्खै नहिँ कोई ॥३०२॥ १ सुतंक जे । २ त्यों । ३ कीजे । ४ लीजे । ५ दिक्खे । ६ कोइय । ७ सोइय । ८ दिजिय । ९ रक्खि । १० लिजिय । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri