हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५८ हम्मीररासो कितेक गढ़ इक्क ठौर किते उमराव महाबल। किते बाजि गजराज किते भट बंक महाबल १ ॥ तुम कहो सकल समझाय मुहिं किहिं हेतु इतै २ गर्वहिं बढ़ै। हम्मीर राव चहुवाँन कै कितौ ३ नृपनि ४ दल सँग चढ़ै ॥३२६॥ हजरति राव हमीर बार बहुतैं समझायव। सुनि महिमा को नाँम रोष करि गव रिसायव ॥ करौं जुद्ध तिर सुद्ध साह दल खंडि बिहंडौं। धरौं सीस हर कंठ सुजस तिहिं लोकहिं मंडौं ॥ हम्मीर राव इम उच्चरै गही टेक ५ छाँड़ौं नहीं। तन जाहु रहै जिय सोच ६ नहिं लाज धरम खंडौं नहीं ॥३३०॥ चौपाई छंद कहे साहि सुनु दूत सु बैनं। कहो ७ राव को पन ध्रम एनं ॥ कितौक दल बल सूर समाजं। कितेक गढ़ सामाँ घर राजं ॥ ३३१ ॥ रहनी करनी प्रजा प्रतापं। बानी ८ बिरद् ९ दाँन द्रब आपं ॥ नीति अनीति ग्राम गढ़ कैसा। सहर १० सरोबर बाट जु जैसा ॥ ३३२ ॥ सत्तरि सहस तुरंगम जानो। दोय लक्ख पयदल भरमानो ॥ सप्तपंच गजराज अमानो ११ । होहि कीच मद बहुत सुदानो १२ ॥ ३३३ ॥ १ बड़ा दल । २ येत । ३ कितका । ४ दसम । ५ तेग । ६ लोभ । ७ कहै । ८ बाना । ६ बिर्द । १० सहस रोष बाग जु जैसा । ११ मानै । १२ दानै । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri