हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
DevanagariHindipublished258 पृष्ठ
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हम्मीररासो ५९ रनथंभौर ग्वालियर बंका। नरवल¹ औ चित्तौड़ सु तंका ॥ रहै जखीरा गढ़ कै जेता। अनगिन² वस्तु न जानत तेता ॥ ३३४ ॥ तुरी सहस इकतीस सु सज्जै। अरु गजराज असी मद गज्जै ॥ सूर वीर दस सहस अमानो। इते राव रणधीर के जानो ॥ ३३५ ॥ दोहरा छंद मेटि मसोत (द) जु सकल तहँ,³ कीके⁴ मंदिर देस। बाँँग निबाज. न होय जहँ, स्रवन कथा हरि बेस ॥३३६॥ नहिं कुराँन कलमा नहीं, मुसलमाँन नहिं पीर। च्यारि बरण आश्रम सुखी, देस हमीर सु धीर ॥३३७॥ अपनै⁵ अपनै धर्म्म मैं, रहैं सबै नर नारि। राजनीति पन तेजजुत, फरै राव⁶ सुखकारि ॥३३८॥ कर काहू कै होय नहि, दुखी न कोऊ दीन। आश्रम किते नबीन⁷ है, ऊँवे मंदिर बीन⁸ ॥३३९॥ पद्धरी छंद रणथंभ दुग्ग बहु बिकट⁹ जानि। तिहिं दरा च्यारि मग सुगम मानि ॥ घाटी सु च्यारि अस्सी सु और। है गै न चलैं अति कठिन ठौर ॥३४०॥
१ नरवल मनु (मन) चीतोड़ सुतंका । २ अगणत । ३ तिहँ । ४ किन्नै । ५ अप्पन । ६ राज । ७ अनूप । ८ दीस, ईस, अंत्यानुप्रास । ९ दुर्ग बहु विधि सु । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri