हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहम्मीररासो ६५ फिरि लरो मरो १ संदेह नहिं तंत मंत यह ही सुबर ॥३६६॥ महरम खाँ उज्जीर साह सौं ऐसैं भाषै २ । चहुवाँनन की बात सबै अगली मुख भाषै ३ ॥ पहले हसन हुसैन सयद् ४ चहुवाँन सुपैले ५ । सात बेर पृथिराज गहे गवरी गहि मेले ६ ॥ बीसल दे अरु पिथ ये जड़ पीर करे अजमेर हनि ७ । महरम खान् इम उच्चरै असो वस चहुवाँन गनि ८ ॥ ३६७ ॥ गीदड़ सिंह सिकार, साह ९ एकौ मति जानो । रणतभँवर दिस भला १०, आप मति करो पयानो ॥ वहाँ राव हम्मीर, और रणधीर अमानो । अरु सामंत अनेक, अधिक तें अधिक बखानों ॥ बहु दुग्ग ११ चक रणथंभ गढ़ १२, यह बिचारि जिय लिज्जिए । तुम अलावदी पीर अति, आप मुहिम्म न किज्जिए ॥३६८॥ दोहरा छंद बहु दुग्ग चक रणथंभ बड़, तुम अलावदी पीर । दुहुँ करामाति सम गनो, आप और हम्मीर ॥३६९॥ छप्पय छंद कालदूत को १३ सेखं, एक हजरति बनवावो १४ । ताहि मारि तजि रोष, कह जिय क्रोध बढ़ावो ॥ लगै प्राण धन दोड, तबै बाजी कोड पावै । १ मिलो । २ भक्खै । ३ चहुवाँनन की बत्त सव्य अग्गालि मुख अक्खै । ४ सैद । ५ पिल्लिय । ६ साह गोरी गहि मल्लिय । ७ बीसल दे अरु पिथ वड़ पीर करिय अजमेर हनि । ८ पन । ९ सोइ यह इक न जानो । १० भुल्लि । ११ दुर्ग । १२ बड़ । १३ को । १४ चनवायौ, बढ़ायौ अंत्यानुप्रास । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri