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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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६६ हम्मीररासो तजे खेत जस १ जाय, बहुरि कछु हाथि न आवै ॥ खूती सरन हमीर कै, रह्यौ दीन जानै दोऊ । किज्जे मुहिम्म नहिं रात्र पै, या मैं तो सुख है सोऊ ॥३७०॥ मिस्र देस खंधार. खरे २ गज्जिनि ३ दल आये । अरु काबुल खुरसाँन, कोपि पतिसाह बुलाये ॥ रूम स्याँम कसमीर, और मुलताँन सु सज्जै । ईराँ तूराँ कटक, वलक आरब धर गज्जै ४ ॥ सब ५ देस रुहंग फिरंग कै, भबखड़ कै सज्जै सुबल । अल्लावदीन पतिसाह कै, चढ़े संग टिड्डी सु दल ॥३७१॥ चढ़े हिंद कै देस, प्रथम सोगठ गिरनारी । दच्छण ६ पूरव देस, लए दल बहल ७ भारी । अरु पहार कै भूप, और पच्छिम कै जानो । दसौं दिसा कै बीर, कहा कोड नाम बखानो ॥ ग्यारा सै अठतीस ८ ये, चैत्र मास द्वितिया प्रगट । चढ़े सुसाह अल्लावदी, कर हमीर पर कटक भट ॥३७२॥

  • भुजंगप्रयात छंद चढ़े साहि कोपे ९ सु बज्जे निसाँनं । चढ़े मीर गंभीर सथ्य १० सुजाँनं ॥ उड़ी रेणु आकास सुझै ११ न भाँनं । धरा मेरु डुल्लै सु भुल्लै दिसाँनं । ३७३॥ सहै सेस भारं न १२ पारं न पावै । डगै कौल दिग्गज १३ अग्गै सुधावै ॥ १ सच । २ खड़े । ३ गजनी, गजनि । ४ ईरान त्वैर औ बलख ठठा ( ठट्ट ) भष्पर से गज्जे । ५ सब देस रुहैलरु फिरँग रूम झगड़ा कै सज्जै सुबल । ६ दक्खिन । ७ बल अति । ८ अटिसिये । ६ कोपं । १० सत्थै । ११ सूझै न नैनं । १२ सम्हारं न पावै । १३ दिग्गं सु अग्गै । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri