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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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पृष्ठ 159

हम्मीररासो ७३ नहिं तजौं टेक छोड़ूँ१ न पन यह बिचार निहचै२ घरचौ३। छिन भंग अंग लालच कहा सुजस खोय जीवन करचौ४ ॥४०९॥ दोहरा छंद जैत छाँडि जोगी कहा, सत छँडै५ रजपूत। सेख न सौंपौं साह कौं, जव६ लग सिर साबूत ॥४१०॥ छप्पय छंद हजरति नई न करूँ करूँ जैसी७ चलि आई। मुसलमाँन चहुवाँन सदा ऐसी८ वनि आई॥ ख्वाजे मीराँ पीर खेत अजमेरि खिसाए।* असी सहस इक लक्ख बहुरि९ मक्का न दिखाए१० ॥ बीसल दे अजमेर गढ़ सो न्रगरा साकौ कियव। नन बरीय सुंदरी कुँवरि सो साह बहुत लालच दियव ॥४११॥ प्रथीराज वर सात साहि गवरी गहि छंड्यौ। कर चूरी पहिराय दंड करि कछुव न मंड्यौ ॥ ता पिच्छै गढ़ दिल्ली साहि गौरी चढ़ि११ आयव१२। रेण१३ कुमार अपार जुद्ध करि सुर पुर धायव१४॥ चहुवाँन बंस अवतंस जो खग्ग१५ त्यागि नाहिंन मुरचौ१६। १ त्यागूँ। २ निश्चय। ३ धरिब ४ करिव। ५ छाँड़ै। ६ जौलौं। ७ ऐसी। ८ तैसे। ९ उलटि। १० खिंदाए। ११ चलि। १२ आए। १३ रमण। १४ धाए। १५ खाग। १६ मुरयय।

  • असुर मारि अजपाल चहूँ दिपि चक्र चलाए। बीसल दे अजमेरि पाय मँडलीक लगाए॥ चीरम दे जालोर गढ़ सो नगरै साकौ कियव। नन बरी जीभ सुंदरि कुँवरि साहच होत... ॥ १० CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri