हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहम्मीररासो ७९ अजमंत १ महुम्मद इक अली । तिन संग असीसु सहस्स चली ॥४४६॥ तिहिं द्वंद अमंद बिलंद कियौ । रणधीर महा रण मेलि लियौ ॥ करि कोप तबै रणधीर मनं । वर बैन कहै पन धारि घनं ॥४४७॥ महिमंद २ अली मुख आय जुरचौ । दुहुँ बीर तहाँ तब जुद्ध करचौ ॥ अजमंत कमाँन लई कर मैं । रणधीर कै तीर कढ्यौ उर मैं ॥४४८॥ रणधीर सु कोपि कै साँगे लई । अजमंत कै फूटि ३ कै ४ पार गई ॥ परियौ अजमंत सु खेत जबै । महमंद अली फिरि आय ५ तबै ॥४४९॥ रणधीर सु कोपि कै बैन कहैं । कर देखि अचै मति भुल्लि ६ रहै ॥ किरवाँन सु धीर के अंग दई । कटि टोप कछू सिर माँझ ७ भई ॥४५०॥ तब कोप कियौ रणधीर मनं । किरवाँन दई महमंद तनं ॥ परियौ महमंद अमंद बली । तब साहि कि सैन सबै जु हली ॥४५१॥ लुथि ८ लुत्थि परैं बहु बीर अरैं । बहु खंजर पंजर पार करैं ॥ १ अजमत्ति । २ महमद्द । ३ फुटि । ४ रु । ५ आयौ । ६ भूलि । ७ माँहि । ८ जुथि । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri