हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८० \qquad\qquad\qquad\qquad\qquad हम्मीररासो धर सीस परै करि रीस मनं । कर पाँव कटै बहु कीन पनं ॥४५२॥ यहि भाँति भिरे चहुवाँन बली । मुरि साह की सेनि सु भग्गि चली१॥ बलखी जु परे जु हजार असी । लखि कालिय अट्ठ सु हास हँसी ॥४५३॥ चहुवाँन परे इक जो सहसं । सुरलोक सबै बर बीर बसं ॥४५४॥ दोहरा छंद असां सहस२ बलखी परे, महमद अजमत खाँन । तहाँ राव रणधीर कै, परे सहस इक ज्वॉन ॥४५५॥ भजी३ फौज सब४ साह की, परे मीर दोइ बीर । करे याद पतिसाह तब, गज्जति गढ़ कै पीर ॥४५६॥ चौपाई छंद भज्जिय५ फौज साह की जबहीं । फिरो फिरो बानी कह सबहीं ॥ तहाँ साह करि कोप सु बुल्लिव । समर भुम्मि अब खंडि सुचल्लिव ॥४५ ॥ सरबसु खाय भोग करि नाना । अबै परम प्रिय लागत६ प्राना ॥ समर बिमुख तैं जानव जोई । हनूँ७ आप कर तजौं न सोई ॥४५८॥ सुने साह कै कोप८ सु बैनं । फिरिय सैन इम मंत्र सु ऐनं९ ॥ १ हली । २ हजार । ३ भगी । ४ जब । ५ भागी, भाजी । ६ लगत । ७ हनों । ८ कोपि । ६ फिरि सैन इक मत्त सु ऐनं । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri