हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८२ हम्मीररासो सब जुरे आय रणधीर हाथ^१ ॥४६४॥ बज्जत सार गज्जंत भ्रम्भ । रणधीर सथ्थ आये स सभ्भ^२ ॥ करि क्रोध जोध बाहंत सार । टूटंत^३ अंग फूटंत^४ पार ॥४६५॥ करि खेल सेल दोउ^५ ओर बीर । बाहंत बीर किरवाँन धीर ॥ हज्जार बीस बघत साह^६ । धर परे बीर करि अकथ गाह^७ ॥४६६॥ रणधीर मीर दोउ भिरे आइ । बाहत्त गहि गुर्ज तब रोस बाइ ॥ लग्गी सुढाल भू त्रुटि^८ ताँम । फिर^९ दई सीस किरवाँन जाँम ॥४६७॥ लग्गी सु सीस धर परचौ जाय । दुइ टुक^१० होय भुमि^११ अद्ध काय ॥४६८॥ दोहरा छंद भयौ सोच जिय साह कै, जीतिय^१२ जंग हमीर । बादित खाँ से रन परे, बीस हजार सु बीर ॥४६९॥ महरम खाँ कर जोरि कै, करै अर्ज तिहिं बार । लै कर सेख हमीर अब, किसो(?) मिल्यौ यहिं बार ॥४७०॥ गही तेग तुम सौँ अबै^१३, हठ नहिं तजै हमीर । सेख देय मिल्लै नहीं, पन सचो^१४ बर बीर ॥४७१॥ १ हत्थ । २ सब्ब । ३ दुट्टंत । ४ फुट्टंत । ५ दुहुँ । ६ साथ सत्य । ७ गाय, गत्थ । ८ तुट्टि, फुट्टि । ६ फिरि धीर दई । १० टूक । ११ भुंमि । १२ जित्यौ, जित्यउ, जीत्यौ । १३ तबै । १४ साँचो । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri