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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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पृष्ठ 169

हम्मीररासो ८३ छप्पय छंद कर कुराँन गहि साह सीस साहिब कौ नायौ १ । गढ़ दिस२दल चहुँ ओर घेरि रज अंबर छायौ ॥ देखि अलावदि साह कहैं दल बहल भारी । अब हमीर की अहलि३आय पहौंचीह सुसारी ॥ महरम्म खाँन इम उच्चरै अदलि हाथ४साहिब तनै । होनहार५ ह्वैहै अबै को जानै कैसी बनै ॥४७२॥ दोहरा छंद हजरति अपने इष्ट पर, पावक जरत पतंग । यह हमीर कबहुँ न तजै, सेख टेक रणथंभ६ ॥४७३॥ साह दसों दिसि जित्ति कै, अब आए७ रणथंभ । कहै८ राव रणधीर सों, जुरौ सूर रण रंग ॥४७४॥ अप्पन९ धर्म न छंडिए, कहै बात१० रणधीर । निसि बासर अब साह सौं, किज्जिय जंग हमीर ॥४७५॥ छप्पय छंद को कायर को सूर द्यौस११बिन दृष्टि१२ न आवै । बिन सूरज की साखि सार छत्री न समावै ॥ बीर गिद्ध१३ अरु संभु सकल पलहारी जेते । धर पर धरैं न पाँव रैन मैं दिनचर जेते१४ ॥ इम कहै राव रणधीर सौं मैं अधर्म्म नाहिन१५ कहूँ । अब अलावदी साह सौं रैन सार कबहुँ न गहूँ ॥४७६॥ १ नाये । २ देसल । ३ अदलि रही चाँद रोज सुसारी । ४ हत्थ । ५ का होनहार । ६ गढ़ जंग । ७ आइय । ८ कहै राव हम्मीर तैं धीर जुड़न रणथ्रंभ । ६ अपणो । १० बत्त । ११ दिवस । १२ दिस्ट । १३ गृद्ध । १४ तेते । १५ नहींन । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri