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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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पृष्ठ 173

हम्मीररासो ८७ सहस¹ सब तीन नीसाँन बग्गै॥ सहस² दस सात आरब्ध छुट्टै। गरज गिरि मेरु पाषाण फुट्ठै॥४९५॥ उठत गुब्बार महि तोप लज्जौ। गए बन छंड़ि³ मृग सिंह भग्गै॥ लक्ख⁴ पच्चीस दल ओर फेरचौ। यह भाँति पतिसाह गढ़ छाड़ि घेरचौ॥४९६॥ कहै पतिसाह नहिं बिलम⁵ किज्जे। चंद दिन⁶ बीचि गढ़ छाड़ि लिज्जे॥ कहै रणधीर मन धीर धरिए। आय चहुआण⁷ सफजंग⁸ करिए॥४९७॥ निस्साँन⁹ सो सद्द१० सुंदर सुवज्जै। रोब रणधीर आयुद्ध११ सज्जै॥ बीर रस१२ राग सिंधू स१३ बज्जै। सहस इकतीस दल संग लिज्जै१४॥४९८॥ सहस दस सूर कुल तेग१५ खेलैं१६। अप्प जिय रक्खि परमाल१७ पेल्लैं१८॥ यह१९ भाँति रणधीर चौगाँन आए। गरद उड़ि जमी असमॉन छाए॥४९९॥ अबदल्ल२० कीरम्म२१ पतिसाह दिल्लै२२। १ तीन सहस नीसाँन दल माहिं बग्गै। २ दो सहस आरखौ तेज छुट्टै। ३ छाड़ि। ४ लाख। ५ विलम्ब (बिलंवं)। ६ रोज। ७ चौगाँन। ८ सफरजंग। ६ नीसाण सों साज सुर सद्द गज्जै। १० सब्द। ११ आवद्ध। १२ रण। १३ सिंधूल। १४ लज्जै। १५ तत्थ। १६ खिल्लैं। १७ परमार। १८ चिल्लैं। १६ इस। २० अवदुल, अबदुल्ल। २१ करीम, करींम। २२ पैले। CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri