भारतकोश
हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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पृष्ठ 174

८८        हम्मीररासो मीर रणधीर चौगाँन खिल्लै ॥ बहै बाँन किरवाँन¹ औ चक्र² चल्लैं । रणधीर कह सूर तुम होहु भल्लै ॥५००॥ साह सों सूर संमुख्ख जुरिए । हवस के मीर दस सहस परिए ॥ दुट्टि³ सिर मीर धड़ पहुमि⁴ लक्खै । पंच सत सूर लड़ि गिद्ध⁵ भक्खै ॥५०१॥ राव रणधीर अप्पन⁶ सिधारे । अबदुल्ल⁷ कीरंम खाँ पुह्मि पारे ॥ साह रणधीर सफजंग⁸ जुरिए । साह दल उलटि दो कोस परिए ॥५०२॥ कहै रणधीर नहि बिलँम किज्जै⁹ । बीति चँद रोज गढ़ छाड़ि लिज्जे¹⁰ ॥ गढ़ कोटहू भाँति¹¹ नहिं हथिय¹² आवै । यूं ही¹³ पतिसाह दल क्यों खिसावै ॥५०३॥ दोहरा छंद बर्ष पंच¹⁴ गढ़ छाड़ि को, नहिं संबत् पतिसाह । द्वादस वर्ष रणथंभ सों, निधरक लरि अव¹⁵ साह ॥५०४॥ छप्पय छंद धनि सु राव रणधीर साह मुख आप सराह्रै । मुझ दिसि सम्मुख आय कोप करि सार समाहैं ॥ १ कैयार । २ चक्क । ३ टूटि । ४ पौहम । ५ गिरध, गिर्ज । ६ आपन । ७ अबदुलकरीम खाँ पौहुमि पारे । ८ सपरजंग । ९ कीजे । १० लीजे । ११ कबहूँ । १२ हाथि । १३ कोपि । १४ पाँच । १५ पति ।

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri