हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहम्मीररासो [Page 89: ८९] साह बचन इम कहै मीर महरम खाँ सुनिजे¹ । जीति² जंग रणधीर धन्य वह राव सुभनिजे ॥ पतसाह राडि सफजंग³ की मनै करिय आपन⁴ सबै । चहुँ ओर जोर उमराव सब किये मोरचा दृढ़ अबै⁵ ॥५०५॥ जबै⁶ राव रणधीर कहै हम्मीर सुणिज्जे⁷ । सबै⁸ हिंद को साथ बोलि⁹ रणथंभ सु लिज्जे¹⁰ ॥ लिखि फर्माँनहूँ¹¹ राव बंस छत्तीस बुलाए । जुरे जंग चौगाँन उमंग दल बहल छाए ॥ कर जोरि सबै हाजिर भए¹² राव बचन या¹³ विधि कहै । मैं गही तेग पतिसाह¹⁴ सों घरि जाहु जौन जीवौ चहै ॥५०६॥ कह काकौ रणधीर राव सुन बचन हमारे । अबै छंडि¹⁵ कित जाहिं¹⁶ खाय करि निमक तिहारे ॥ अलीदीन सों जुद्ध छंडि गढ़ चौरै मंडों । जिती साहि की सेन मारि खंग खंड बिहंडों ॥ चादूँ¹⁷ सुनीर या वंस को अकथ गत्थ¹⁸ ऐसी करूँ । रबि लोक भेदि भेटूँ सुभट अप्प¹⁹ सीस हरं हिय धरूँ ॥५०७॥ दोहरा छंद कहै राव हम्मीर खाँ, मंत्रि एक²⁰ रणधीर । जमीति गढ़ चित्तौर की, अजहुँ²¹ न आइय²² बीर ॥५०८॥ लिखि फर्मांन हमीर तब, पठए गढ़ चित्तौर । वंचि²³ खाँन बल्हन²⁴ कुँमर, हर्ष²⁵ कीन नहिं थोर ॥५०६॥
पाद-टिप्पणियाँ (Footnotes)
१ सुनिए । २ जित्ति । ३ सफरजंग । ४ अप्पन । ५ सबै । ६ जब सुराव । ७ सुणीजे । ८ सभै । ६ राण । १० लीजे । ११ फुरमाना । १२ अहै । १३ इम । १४ हजरत्ति । १५ छाड़ि । १६ जायें । १७ चाढूँ । १८ गाथ । १६' आप। २० इक्क । २१ अजौं । २२ आए । २३ वाँचि । २४ बाल्हन । २५ हर्ष न किन्न्यउ । ९९-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri