हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें९० हम्मीररासो चौपाई छंद हर्षे उभै कुँमर चौहाँनं। चतुरँग कै तुरंग सजि आनं॥ सोला सहस चमूँ सजि सारी। सजे खाँन बल्हन¹ सी भारी॥५१०॥ सहस तीन² कमध्वज्ज सु जानो। सहस अट्ठ³ चहुवाँन बखानो॥ सहस पंच पम्मार⁴ अमानै। सोला सहस सजे करिवानै⁵॥५११॥ मोतीदाम छंद मिले तब आय कुमार सु दोय। हमीर सुचाव कियौ बहु जोय॥ बढ़्यौ हिय हर्ष दुहूँ⁶ उर सोय। कहैँ⁷ तब बैन सु राव सु होय॥५१२॥ क्रियौ सनमाँन सुराव अपार। मिलंत कुँवार⁸ दयौ सिर भार॥ रख्यौ तुम सेख भए जग धन्य। रहै नहिं कोय सदा जग अन्य॥५१३॥ रहै जग कित्तिय⁹ नित्ति अभंग। सदा यह देह कहैँ¹⁰ छिनभंग। जिते हम सेवक ज्यों अब ठड्ढ¹¹। रहो निहचित्त¹² अभै यह गड्ढ¹³॥५१४॥ करैं हम जंग लखो अब हत्थ। १ बाल्हन । २ तीस । ३ आठ । ४ पँन्वारन आनो । ५ किरवानो । ६ दहूँ । ७ कियौ सु जुहार मिले वर दोय । ८ कुँमार । ६ कीरति । १० नहीं । ११ अवट्ठ । १२ रहै निश्चिंत । १३ गल्ह ।