हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें९३ हम्मीररासो कहे तदि¹ बैन हँसे जु कुमार ॥ धरो तुम सीस हमारे जु² मोर । लरैँ सिर सेहर बाँधि³ सजोर⁴ ॥५२१॥ बँध्यौ तब मौर कुमारन सीस । दई बहु भाँतिन आस असीस ॥ कियौ बहु हर्ष कुमार अपार । गए हर मंदिर सो तिहिं बार ॥५२२॥ गनेसुर संकर पूजि⁵ सुभाय⁶ । करे बहु ध्याँन गहे जब⁷ पाय⁸ ॥ चढे बरबीर बढ्यौ हिय चाव । बजे बहु बाजि⁹ निसॉँनन घाव¹⁰ ॥५२३॥ गजे असमाँन धरा हुब भाय¹¹ । गजे¹² घनघोर घटा मनु छाय¹³ ॥ तुरंग अनेक सुफेरत सूर । बनी तिन उप्पर पक्खर पूर ॥५२४॥ झलक्कत नूर चमककत सेल । चढ़े मुख ओप¹⁴ बढ़े मुख मेल ॥ उड़े¹⁵ रज अंबर सुज्झ न भाँन । हँसे हर देखत¹⁶ लुट्ठिव ध्याँन ॥५२५॥ चली सँग अच्छरि जुग्गनि ताँम । मिली बहु पंखनि¹⁷ गिद्धनि जाँम ॥ मिले बहु भूचर खेचर हूर । चले पल चारिय भूत सुभूर ॥५२६॥ १ तब । २ सु । ३ वंधि । ४ मोर । ५ पुज्जि । ६ सुभाइ । ७ तव । ८ पाइ । ६ बादि । १० हाव । ११ भाइ । १२ गज । १३ छाइ । १४ नूर । १५ उठी । १६ दिक्खत, पिक्खत । १७ पक्खनि । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri