भारतकोश
हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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पृष्ठ 182

९६ हम्मीररासो उतैँ मीर जम्मील ध्यायौ हँकारं । इतैँ खाँन धायौ भिरचौ इक्क १ बारं ॥ उतैँ मीर तीरं चलायौ हँकारी । लग्यौ बाजि कै सो भयौ वारि पारी ॥५४४॥ पर्यौ खाँन को बाजि फुट्ठौ २ सु अंगं । चढ़े और बाजी करथ्यौ फेरि जंगं ॥ दई खाँन जम्मील ३ कै अंग बच्छी । पर्यौ भुम्मि मीरं सुतो आय मुच्छा ॥५४५॥ दोउ सैन देखैँ भिरे बीर दोई । भए लथ्थ वथ्थं कुमारं सु सोई ॥ पर्यौ जोर भारी कुमारं सु जान्यौ । तबै राव हम्मीर उप्पर सुठान्यो ॥५४६॥ लियौ बोलि संखोदरं सूर सोऊ ४ । करो ऊपर ५ जाय कुम्मार दोऊ ६ ॥ महाबीर ७ अजौँन बालगधु (बालक) सूरं । महायुद्ध ८ जानैँ इतो बै करूरं ॥५४७॥ चले सूर संखोदरं खेत आए । उतै आरबीसेन ९ द्वै १० लक्ख धाए ॥ उड़ैँ बाँन गोला गजं बाजि फुटैँ ११ । वहैँ बाँन कम्माँन ज्यौँ मेघ बुट्ठैँ ॥५४८॥ धरैँ १२ आयुधं १३ बीर सौं बीर बुल्लैँ । परैँ सीस भू मैं १४ किती १५ सीस मल्लैँ ॥ १ एक । २ फूट्यौ । ३ जम्माल । ४ सोई । ५ उप्परं । ६ सोई । ७ महाबीर अजौँन बाहू लघु सुसूरं । ८ कहा । ६ सेख । १० दोउ, है (अश्व) । ११ फूटैँ । १२ भरैँ । १३ आवच । १४ भुम्मी । १५ किती धूम झुललैँ । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri