हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहम्मीररासो ९७ कहै खाँन कुम्मार वैनं हँकारी । सुनो सबै सथ्यं करो जुद्ध भारी ॥५४९॥ रहै नाँम लोकं महा मुक्ति मिल्लै । रहै नाहिं कोई सदा आय१ भिल्लै॥ चलाए गजं कोपि२ कुम्मार सोई । उतै आरबी मीर जम्माल३ होई ॥५५०॥ तबै वीर बालन्नसी कोप किन्नौ । महा४ तेग जम्माल कै मध्य (सीस) दिन्नौ ॥ कट्यौ टोप ओपं लगी जाय मध्यं । तबै मीर बालन्न भय लुब्ध वध्यं ॥५५१॥ कटार' कुमार' चलायौ५ सु भारी६ । पर्यौ मीर जम्मील भू मैं७सु थारी ॥ सबै सथ्थ जम्माल की कोपि८धायौ । तहाँ बालन्नं मारि धरनी गिरायौ९ ॥५५२॥ तबै खाँन कुम्मार धायौ१० रिसाई । घनी सेन आरब्ब धरनी मिलाई११ ॥ तबै बीर संखोदरं जंग१२ कीनौ । किते आरबी खेत पार्यौ नबीनौ ॥५५३॥ किते सेल खेलं करैं वार पारं । भभक्कैं घटैं घाव छुट्टैं पनारं । बहैं तेग बेगं परे१३ सीस भारी । उड़ैं घोर रुंडं परैं मुंड कारी ॥५५४॥ १ आप । २ कुप्पि । ३ जम्मीर । ४ तबै तेग (खग्ग) जम्मील कै अंग दीनौ । ५ लगायौ । ६ भुम्मिः । ७ धारी । ८ कुप्पि, जम्मील को देखि । ६ मिलायौ । १० धाये । ११ गिराई । १२ जुद्ध । १३ परी । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri