हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें९८ हम्मीररासो परे दोय कुम्मार किन्नी१ अकत्थं । बरी अच्छरी सूर लोकं सु मध्यं ॥ परे मीर आरब्ब कै पोन लक्खं । तहाँ हिंद की भीर सौरा सुभक्खं२ ॥५५५॥ परे दो कुमार महाबीर बंके । परे एक३ संखोदर कीन४ हंके ॥ तहाँ आठ५ हज्जार चहुवाँन जाँनं६ । परे तीन हज्जार कमधवज्ज७ माँनं ॥५५६॥ पँमारं परे पाँच८ हज्जार सोई । परे बीर सोला सहस्रं सुजोई ॥ परे स्वामि कै कज्ज९ कुम्मार दोई । सुनी राव हम्मीर जीते सु सोई ॥ भजे आरबी ज्यों बचे१० जंग तेयं । कहै साह देखो सु हिंदू अजेयं ॥५५७॥ दोहरा छंद परे सहस सत्तरि तहाँ, मीर अरब्विय११ संग । हय गय पाँच हजार परि, सत जमाल से अंग१२ ॥५५८॥ छप्पय छंद तब सु राव रणधीर साहि पै१३ तेग समाही । १ कीनी । २ सोरा सुसत्थं । ३ इक्क । ४ किन्न । ५ अष्ट । ६ ज्वाँनं । ७ राठ्यौर, रट्ठौर । ८ पंच । ९ काम । १० रहे । ११ आरबी । १२ तहाँ परे सोरह सहस दुहूँ कुँवर कै सत्थ । बरी इते तहँ अप्छरा (अच्छरी) धरे हार हर मत्थ । पाँच बरस गढ़ छाड़ि कै लरे राव रणधीर । तब अलावदी कोपि कै कहे बचन तजि नीर । १३ साहि सों । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri