हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहम्मीररासो ९९
.समो¹ सु पहौँच्यौ आय सु तो मिट्टै नहीँ काही ॥ चढ़े खेत रणधीर साहि दोनू² बतराए । तजै न हठ हम्मीर कहा जो तुम सत³ आए ॥ रणधीर राव इम उच्चरै समुझि साहि चित लिजिए । . गढ़ रणथंभ हमीर को हजरति हठ न किजिए ॥५५६॥ कहै साहि रणधीर राव कौ किन सम्झावो । करो राज रणथंभ सेख⁴ कौ कद्मौँ लावो ॥ होनहार सो भई मिटे मेटी न मिटाई । घटै हटै हठ राव तबै हमारी पतिसाई ॥ नहिँ तजै⁵ राव हठ मैं तजौँ कौन⁶ साह मो सौँ कहै । यह प्रगट बत्त७ संसार८ महिँ भिरैँ दोय एकै९ रहै ॥५६०॥ कहै राव पतिसाह सुणो रणधीर अमानो । इतो राज तुम करो जितो हम सौँ नहिँ छानो ॥ ये१० गढ़ च्यारि सु धीर हुकुम किसकै तुम पाए । कबहुँक ११ फिरे रकेब सीस कबहुँ नहिँ १२ नाए ॥ गिरि सूरज पलटै पहुमि कोटि (रि) बचन कह कोय१३ । सेख छाड़ि उलटौ फिरै यह कबहुँ नहिँ होय१४ ॥५६१॥
दोहरा छंद
चढ़े साहि दल बिपुल जब, छे़किव१५ गढ़ रणधीर । तब चहुवाँन रिसाय कै, संमुख जुड़े१६ सु बीर ॥५६२॥
१ संमत । २ दोउ । ३ बतराए । ४ सेख गहि कद्मु लाओ । ५ नन तजै । ६ कै सहाय मोसों ( हमसन ) । ७ बात । ८ सारी मही । ९ इक्कै । १० यह । ११ कबहुँन । १२ ननवाए । १३ कोऊ कहो । १४ सेख छंडि उलटौ फिरौं तौ मोहिं साहि जग को कहो । १५ छिकिव । १६ जुट्टिग, जुट्टिय ।
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