भारतकोश
हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

पृष्ठ 187, कुल 258 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 187

हम्मीररासो १०१ दुहुँ ओर सु तोप सु कोप¹ छुटे। गढ़ कोट न रूंधत² पार फुटे ॥५६८॥ वरषै घर आगि³ सु धूम उठा। झर अंबर भुम्मि कराल बुठी ॥ बहु गोलन गोलन गोल परे। गजराजन सौँ गजराज जुरे४ ॥५६९॥ हय सौँ हय पयदल पयदल सौँ। जुरे५ बहु जोध महाबल सौँ ॥ बहु६ बाँन दुहूँ दल माँझ परैं। धर सीस कहूँ कर पाँव भरैं ॥५७०॥ बहु सोर अँधार सु घोर भयौ। निसि बासर काहु न जानि७ लयौ ॥ कर कुंडिय८ बीर कमान कसैँ। गज बाजिन फुट्त पार लसैँ ॥५७१॥ वरषैँ मनु पावस बुंद अयं। बहु फुट्त पक्खर९ कंगलयं ॥ तहँ लागत१० सेल सु पार हियं। मनु श्रोन पनारन तैँ बहियं ॥५७२॥ लगि तेग करैँ दुव दुक्क११ तनं। जिमि१२ सीस परैँ तरबूज मनं ॥ तहँ साह सु सेन मुरकि चली। चहुवाँन तबै करि कोप बली ॥५७३॥ मुरकी पतसाह तनी जु अनी। १ कोपि । २ रुकत । ३ अग्गि । ४ भिरे । ५ जुरिये, जुटिये । ६ चहुवाँन । ७ ज्ञान लह्यौ । ८ कुंडल, कुंडलि । ६ पाखर । १० लगत । ११ टूक । १२ जिन, जिहिं । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri