हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
DevanagariHindipublished258 पृष्ठ
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१०२ हम्मीररासो मुख१ बात सबै पतसाह भनी ॥ करि कोप तबै पतिसाह कहै । मुहिं जीवत सेन सु भज्जि२ चहै ॥५७४॥ बकसी तब आय सलाँम कियं । लख रूमिय अप्प३ सु संग दियं४ ॥ रणधीर तबै सनमुख पिलै५ । बकसी करि कोप सु ओप मिले ॥५७५॥ गुरजैं रणधीर कै सीस दईं । तिन ढल्ल सु उप्परि६ ओट लईं ॥ बरछी रणधीर सु अंग दियं । धर फुट्टि७ सु बाजि८ कौ पार कियं ॥५७६॥ हय९ तैं बकसी धर माँहि पर्यौ । तिहिं१० संग सु मीर पचास गिरचौ११॥ इक रूमिय धीर सूँ आय जुरचौ । किरवाँन लिये मन नाहिं मुरचौ१२॥५७७॥ रणधीर इतैं उत खाँन बलं । लथ वत्थ भए दुख देखि दलं ॥ रणधीर कटार सूँ पार कियौ । बलखाँन सु तेग जु कंध दियौ ॥५७८॥ सिर तुट्टत१३ धीर उठ्यौ धड़यं । बलखाँनहिं आय गह्यौ करयं ॥
१ मुख वाह सुवाह सु साह भनी ! २ भाजि । ३ आप । ४ सनमुख सुई दिय (सुहिंदुव) पिल्लि दियं (पैपिलियं) । ५ लियं । ६ ऊपर । ७ फूट । ८ सुबाज कै । ६ गज तैं । १० तब सोंगी (संगी) सुधीर सु मीर अर्यौ । ११ परे, गिरे—अंत्यानुप्रास । १२ लख पाँच लिये मन माहिं मुर्यौ । १३ टूटत । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri