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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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पृष्ठ 194

१७८ हम्मीररासो कीनी तयार गढ़ कौ अखंड ॥ पतसाह कहै महरम सुबत्त । तुम सुनो एक हम करी १ चित्त ॥६१०॥ हम्मीर राव की तोप देखि । दग्गो सु आपनी तोप लेखि ॥ यह तोप फुटे गढ़ फ्ते होय । संदेह कौन या मैं न सोय ॥६११॥ गोलम्मदाज तब करि सलाँम । दागी २ सुतोप लखि ताव ताँम ॥ लग्यौ सुतोप कै गोल जाय । नुकसाँन भयौ तिहिं कछुक जाय ३ ॥६१२॥ यह सुनी श्रवण हम्मीर राय ४ । ततकाल तोप पै गयौ धाय ॥ देखी सुतोप साबूत जानि । तब कह्यौ राव तुम सुनो कानि ॥६१३॥ पतसाह तोप खंडै सुकोय । हौं करौं बड़ो ताकौ सुजोय ५ ॥ गोलम्मदाज कीनौ ६ जुहार । पतसाह तोप फूटी ७ सुपार ॥६१४॥ तब कही साह महरम सुदेखि । गढ़ विषम बीर छंडै न टेक ८ ॥ अब करो ९ क्यों न तजबीज और । किहिं भाँति हाथि आवै सुजोर ॥६१५॥ कर जोर कही महरम्म खाँन ।

१ धरी । २ दग्गी । ३ ताय । ४ राव, धाव अंत्यानुप्रास । ५ सजोय । ६ किन्वउ । ७ फुट्टी । ८ पेखि । ९ करै कौन । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri