हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११० .हम्मीररासा हम्मीर राव ऊपरि$^१$ प्रसाद । तहाँ करयौ अखारौ इंद्रबादि ॥ तहाँ चंद्रकला पातुर प्रबीन । सो नृत्य करै सुंदर नबीन ॥६२२॥ बाजत मृदंग बीना सितार । कट तार तार सहनाइ सार ॥ महुवरी सु खंजरि तास संग । श्रीमंडल सुर औ जलतरंग ॥६२३॥ षट तीस राग रागनि सुसुद्ध । सो सुनै नृपति$^२$ चहुवाँन उद्ध ॥ गंधार देव भैरव सुजाँन$^३$ । अरु राँम कली बिम्भा समाँन$^४$ ॥६२४॥ बजि ललित बिलावल गिरी देव । सुर आसा टोडी सकल भेव । हिंडोल और सारँग अनूप । नट और स्त्रोयुत राग भूप ॥६२५॥ करि गौरी को अलाप आनि । तब दीपग अरु सगरे कल्याँन ॥ सुर गावत पंचम अति प्रबीन । सुनि केदारो मारो सुमीन ॥६२६॥ खंभाच रू मारू परज पाइ । सुम सोर उड़ैसी जैत गाइ ॥ अड्याणी$^५$ कन्हर बहु सुभेव । बंगाल गौड़ मालव सुदेव$^६$ ॥६२७॥ ————————— १ उप्पर । २ भूप । ३ सुजानि । ४ मानि । ५ अड्याणो । ६ एव । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri