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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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१२६ हम्मीररासो छंद त्रोटक गजराज सबै सत पंच सजे । गिरगात¹ मनो घन भट्ट गजे ॥ सु महावत जंत्रन मंत्र रजे । करि बंधन² पीर सुधीर कजे ॥७२९॥ परि पांय सजाय निकट्ठ खरे । पग³ खोलि जंजीर सुबीर अरे⁴ ॥ बिरझाय भले मन हत्थ कियं । असनाँन कराय सँगार लियं ॥७३०॥ तन तेल सिँदूरन चित्र कियं । सिर चंद अमंद सुरंग दियं ॥ जनु कज्जल बह्वल पावसयं । तड़िता घन⁵ चंद कि मावसयं ॥७३१॥ सजि डंबर अंबर सो लगियं । घन घोर घटा सु पटा गिजियं⁶ ॥ कसियं हवदा ध्वज धार बली । मनु पंगति पन्नग की जु चली ॥७३२॥ बर्षा घन घोर सु जानि परै । कबि रूप स्वरूप समाँन करै ॥ बहु बह्वल बारन बृंद बढ़े⁷ । ध्वज बैरख लाल निसाँन कढ़े ॥७३३॥ तड़ितां घन मैं दमकंत मनो । बगपंति सुई गजदंत भनो ॥ गरजै बहु गाज सु गाज मनं । १ गिररात । २ बंदन । ३ पदपाय सुजाय ४ खुल्हि । ५ धनु । ६ गजिय । ७ चढ़े । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri