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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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हम्मीररासो १२९ दोहरा छंद श्रवण सुनै बर बीर रस, सिंधव राग अपार । हरखि उठे दोउ तिहिं समैं, मिलन बीर सिंगार ॥७४७॥ छंद हनूफाल मिलनै सुबीर सिंगार । दुहु हरष हिये अपार ॥ बर बीर हरखेउ अंग । उत अच्छरी¹ सु उमंग ॥७४८॥ तन उभै मज्जन कीन । भये दाँन माँनस लीन ॥ तहाँ कौच वीर नवीन । रचि बाल बसन प्रबीन ॥७४९॥ इत टोप बीरन सीस । कसि कंचुकी तिय रीस ॥ बहु अस्त्र बंधि सु बीर । अच्छरि सु भूषण हीर ॥७५०॥ इत सूर खङ्ग सु लीन । उत बाल अंजन दीन ॥ इत ढाल बीरन बंधि । ताटंक श्रवणनि संधि ॥७५१॥ सामंत बंधि कटार । अच्छरी तिलक सुधार ॥ मुख पाँन ज्वॉन सुभाव । तिय चंप दंत जराव ॥७५२॥ इत कसी सूर कमाँन । दृग बाम चमक निदाँन ॥ धरि बीर कर दस्ताँन । अच्छरिय महँदी पाँन ॥७५३॥ बरच्छी सु लीनिय सूर । बर माल कीनिय हूर ॥ सिरपेच सूर जराव । तिय सीस फूल सुहाव ॥७५४॥ इत तबल तौरा नेत । तिय हाव भाव समेत ॥ रचि सूर सेलिय अंग । अच्छरिय हार उमंग ॥७५५॥ कसि तून बीर स जंग । अच्छरिय नैन अपंग ॥ कर केहरी नख सूर । उत पानि पानि सहूर ॥७५६॥ लिय बीर तुलसिय माल । बर माल लीन स बाल ॥ कसि सूर मोजा पाँय । नूपूर सु बाल सुहाय ॥७५७॥ कसि सूर बाजि सु तंग । बिम्माँन बाल उमंग ॥ इहि भाँति सूर सबाल । उतकंठ मिलन तिकाल ॥७५८॥ १ अपछरी । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri