हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३२ हम्मीररासो करैं दोय टूकं समुक्कै१ समूरं ॥ बहैं तेग कंधं परैं गज्जराजं । लगे आयुधं यों झरं सर्व साजं ॥७७२। कटैं कंगालं अंग ओ जीन वाजी । तबै सूर२ रीझैं करैं मालसाजी ॥ कटारी बहैं वारपारं निहारैं३ । मनो स्याम उर माँझ कौस्तुभ सम्हारैं ॥७७३॥ कहूँ बंजरं पिंजरं बेगि फारं । मनो हाथ वाला अहारी निकारं ॥ छुरी हथ्थ जोरं करैं सूर हाँकैं । कहूँ मल्ल युद्धं करैं बीर खाँकैं ॥७७४॥ परैं सीस भूमैँ४ उठैं रुंढ५ घोरं । दुँहू सेन देखंत कौतुक्क जोरं ॥ किती अंत उरझंत लटकंत६ भूमैँ । किते घायलं घाव लग्गे सु भूमैँ७ ॥७७५॥ भरे योगनी८ पत्र पीवंत पूरं । परैं ज्यों मलेच्छं बरैं आय हूरं ॥ किलक्कैं जु काली हँसैं बार बारं । करैं भैरवं घोर सोरं अपारं ॥७७६॥ भगी साह की सेन देखंत दोई । कहै बैन कोपं बकं सीस सोई ॥ किते भागि जैहो अरे मूढ़ आजं । जिते९ बीर चहुवाँन हम्मीर गाजं ॥७७७॥ १ टूकैं सु भूकैं, दुक्कं सु झुक्कं । २ शंभु रीझैं । ३ बिहारैं । ४ भुम्मी । ५ सीस । ६ लरझंत । ७ घूमैं । ८ जुग्गनी । ६ जितैं चाहुवाँनं हमीरं सुगाजं । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri