भारतकोश
हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

पृष्ठ 218, कुल 258 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 218

१३२ हम्मीररासो करैं दोय टूकं समुक्कै१ समूरं ॥ बहैं तेग कंधं परैं गज्जराजं । लगे आयुधं यों झरं सर्व साजं ॥७७२। कटैं कंगालं अंग ओ जीन वाजी । तबै सूर२ रीझैं करैं मालसाजी ॥ कटारी बहैं वारपारं निहारैं३ । मनो स्याम उर माँझ कौस्तुभ सम्हारैं ॥७७३॥ कहूँ बंजरं पिंजरं बेगि फारं । मनो हाथ वाला अहारी निकारं ॥ छुरी हथ्थ जोरं करैं सूर हाँकैं । कहूँ मल्ल युद्धं करैं बीर खाँकैं ॥७७४॥ परैं सीस भूमैँ४ उठैं रुंढ५ घोरं । दुँहू सेन देखंत कौतुक्क जोरं ॥ किती अंत उरझंत लटकंत६ भूमैँ । किते घायलं घाव लग्गे सु भूमैँ७ ॥७७५॥ भरे योगनी८ पत्र पीवंत पूरं । परैं ज्यों मलेच्छं बरैं आय हूरं ॥ किलक्कैं जु काली हँसैं बार बारं । करैं भैरवं घोर सोरं अपारं ॥७७६॥ भगी साह की सेन देखंत दोई । कहै बैन कोपं बकं सीस सोई ॥ किते भागि जैहो अरे मूढ़ आजं । जिते९ बीर चहुवाँन हम्मीर गाजं ॥७७७॥ १ टूकैं सु भूकैं, दुक्कं सु झुक्कं । २ शंभु रीझैं । ३ बिहारैं । ४ भुम्मी । ५ सीस । ६ लरझंत । ७ घूमैं । ८ जुग्गनी । ६ जितैं चाहुवाँनं हमीरं सुगाजं । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास) · पृष्ठ 218, कुल 258 में से · BharatKosha