हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
DevanagariHindipublished258 पृष्ठ
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हम्मीररासो १३३ भ्रम्यौ साह संगं तज्यौ जंग भारी । कहै साह उज्जीर सौं जो हँकारी ॥७७८॥ दोहरा छंद कहा राव हम्मीर कै, सूर वीर बलवाँन । सबै १ सु खाय हमारिये, जग समै प्रिय प्राँन ॥७७९॥ छप्पय छंद कहै साह उज्जीर सुनो आपन २ मन लाई । जिते राव कै बीर सबै ३ छत्री प्रन ४ पाई ॥ लरत भिरत नहिं टरत करत अद्भुत रस सीतो ५ । करत जंग अनभंग अंग छिन भंग है नीतो ६ ॥ नहिं सहत सार आपण ७ संपन ८ सबै मीर उमराव मर । किज्जे सु कौन मत तंत अब कहो बुद्धि आपन २ समर ॥७८०॥ कहै उजीर १० कर जोरि सुनो हजरत यह किज्जे । च्यारि सेन चतुरंग संग नामी कर ११ दिज्जे ॥ एक १२ सेन दिवान्नि १३ एक बकसी भड़ वंके । एक १४ गोल मोहिं जानि आप १५ एकन कर हंके ॥ यह भाँति सेन चतुरंग कै अनी च्यारि करि जुट्टिए । हम्मीर राव चहुवाँन १६ तैं फते आप लहिं हट्टिए १७ ॥७८१॥ दोहरा छंद करि करि मंत्र उजीर १८ तब, चढ़े संग लै मीर । च्यारि अनी करि साहि दल, जुरे जंग सब १९ बीर ॥७८२॥
१ सर्वसु । २ अप्पन । ३ धर्म । ४ पन । ५ जीते, जित्ते, सीत्तो । ६ नित्ते, जित्तो । ७ अप्पन । ८ सयन । ६ अप्पन । १० कह वजीर । ११ नर । १२ इक्का । १३ दीवाण, दिब्वाँन । १४ इक । १५ अप्पन इकन करि हंक्के । १६ के । १७ खुट्टिए । १८ वजीर । १६ फिरि ।
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