हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
पृष्ठ 220, कुल 258 में से
संदर्भ में पढ़ें१३४ हम्मीररासो त्रिभंगी छंद करि मंत्र असेसं सूर सु देसं, बंके बैसं सज्जायं । हय गय १ चढ़ि बीरं फिरे सुमीरं, धरि धरि धीरं लज्जायं ॥ गजराजन संज्जे अग्गौ रज्जैं, बीर गज्जे लखि लज्जैं । नीसाँन २ फरकैकैं धीर धरक्कैं, हर हर वक्कैं गलगज्जैं ॥७८३॥ दोउ ३ओर उमग्गै ४ समर सु रड्डु ५, बढ़ि बढ़ि तडैं नख ६ खडैं । बहु तोपन छुट्टैं बीर अहुट्टैं, फिरि फिरि जुट्टैं वल चंडैं ॥ बाजे बहु बज्जैं जनु घनु गज्जैं, सूर समज्जैं वल रज्जैं । पद रुत्थ ७ पतालं अरि उर सालं, उट्टत ८ भालं रण सज्जैं ॥७८४॥ छुट्टैं बहु बाँनं संधि ९ कमाँनं, अरि उर प्राँनं बहु कडढैं । लग्गैं उर सेलं अरि दल पेलं, बिग्रह भेलं बल ठड्ढैं ॥ किरवाँन दुधारं हय गय पारं, सूर सँहारं उर फारं । करि जोर कुठारं बहुत १० करारं, भिरत जुझार रनभार ॥७८५॥ गिद्धिय ११पल भक्खैं रत १२बहु चक्खैं, जंबू अक्खैं हिय हर्षै । ... ... ... ... बहु पत्र भरावैं मिलि मिलि गावैं, धरि धरि धावैं मन भावैं । पत्नअस्ति चचोरैं बसन निचोरैं, लुब्धि टटोरैं गुन गावैं ॥७८६॥ दोहरा छंद यहिं बिधि दुहुँ दल आहरे, भिरे १३ दोउ दल ऐन । रहे अहल चहुवाँन हू, खाँन सकल हठि सैन ॥७८७॥ अबदल मीर जु साहि कै, परे खेत मैं १४ धाय । पफरै राव हमीर कौ, पंकरै १५ अस पति पाय ॥७८८॥ ल्याऊँ गहि हम्मीर कौ, रीझ दिजिए मोहिं । १ गज । २ निस्साँन । ३ दुहुँ । ४ उमड्डुँ । ५ डट्टै । ६ तंडैंतन खंडैं । ७ रुथ, रुप्पि । ८ उद्धत । ६ संगि । १० बहुत । ११ गिद्धनि । १२ रत्तहु । १३ मिरंग, मिरिउ । १४ पै । १५ परसै । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri