हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहम्मीररासो १३५ जितनो हिंदू को वतन, पाऊँ अब कर जोहिं ॥७८६॥ बीस सहस अबदल पिले, इत हमीर - कै - वीर । आप¹आप जय स्वामि की, चाहत मंगल धीर ॥७९०॥ छंद रसवाल मीर पिल्ले तवै, वीर अबदुल जबै। कहै बैन वाहं, सुनो आप साहं ॥७९१॥ गहूँ राव ल्याऊँ, रणत्थंभ पाऊँ। कमाँनस्सुग्रीवं, गरै डारि जीवं ॥७९२॥ लगूँ साह पगैं, उठै कोपि जग्गैं। हजारं सु बीसं, नमाए सु सीसं ॥७९३॥ गजं साज² तीसं, करै जीव रीसं। उतैं राव कोपे,³ पिले बीर ओपे ७९४॥ उठी बंक मुच्छं, लगी जाय चच्छं। मनो बीर मग्गै, अकासं सु लग्गै ॥७९५॥ मिले बीर दोऊ, करै जोर सोऊ। भिरै गब्ज गब्जं, बजे बीर बज्बं ॥७९६॥ तुरंगं तुरंगं, मचे जोर जंगं। पयहं पयहं, बकै कोप चहं ॥७९७॥ भभक्कंत बाँनं, उड़ै लग्गि ज्वानं। लगै तेग सीसं, उभै फाँक दीसं ॥७९८॥ लगै जम्म दड्ढं, करै पाँन गढ्ढं४। परी लुत्थि जुत्थं, करी जो अकत्थं ॥७९९॥ करी जूह लोटैं, पबै जानि कोटैं५। तुरंगं धरन्नी, सु लड्ढै बरन्नी ॥८००॥ १ अप्प अप्प । २ सज । ३ कुप्पे । ४ दाढं, गाढं अंत्यानुप्रास । ५ लुट्टैं, कुट्टैं । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri