भारतकोश
हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

पृष्ठ 242, कुल 258 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 242

१५६            हम्मीररासो          अब १ बृत कहे छल चातुरता ।      अब जाहु यहाँ हम सेन सजी ।          बिन साह को जुद्ध करंत ज़जो ॥९२९॥            वचनिका • अब राव हम्मीर दूत कौं नीति सहित२ उत्तर दियौ अरु युद्ध को उछाह कियौ आपणां उमरावों सों कही आयुध ३ छत्तीस ४ सों च्यारि आवधां सूं युद्ध कीजे५ अर जग मैं अमर जस लीजे ॥ तोप, बाण, चादरि, हथनालि, जंबूर, बंदूक, तमंचा, कमाँन, सेल इन६ नै त्यागो । अरु आयुध च्यारि लीजे । तरवारि, छुरी, कटारी, बिषाण, मल्ल युद्ध करि हजरति नै हाथ दिखावो तौ सायुज्य मुक्ति पावो ॥ पातसाह की ज्यान बखसीस करो और अच्छरी ७ बरो यह हम्मीर की आज्ञा साथै धरि राव हम्मीर कै उमरावाँ केसरिया साज बणाया अरु बेहरा बाँधि पातसाह की फौज परि हाँको८ कियौ ॥            त्रोटक छंद      कछु जंत्र न तोप न' कंत९ नहीं ।        तजि चापन चक्रन बाँन जिहीं ॥      किरवाँन१० लई कर बाजि चढ़े ।        चहुवाँन अमाँन सुखेत बढ़े ॥९३०॥      उत मीर बजीर रु साहि निजं ।        करि कोप तबै पतिसाह सजं ॥      तरवारि दुधार अपार बहै ।        सब साहि सु सैन समूह दहै ॥९३१॥

• १ अरु नृत्य ( व्यर्थ ) । २ संजुक्त । ३ आयुध । ४ छः तीस मैं । ५ किजिये । ६ यन । ७ अप्छरा । ८ हल्लो । ९ रुकंत । १० कम्माँन ।