हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहम्मीररासो १५९ साह निसाँन सु अग्र¹ करि, चले भवन हर्षोत ॥६४२॥ पद्धरी छंद भगि साह सेन जुत उलट आय । तजि विविध भाँति बाना² जु ताहिं ॥ सब साह हसम लीनी छिनाय । नृप सकल खेत सोधो कराय ॥६४३॥ बजि दुंदुभि जय जय धुनि सु आय । सत्र घायल नृप लीने उठाय³ ॥ करि अग्ग⁴ साह नीसाँन भुल्लि । लखि भूप हसम हर कह्यौ फुल्लि ॥९४४॥ सब राज लोक तिय जिती जानि । सब सार परस्पर हरी⁵ आनि⁶ ॥ चहुवाँन दुग्ग किन्नौ प्रबेस । यह सुनिय राव तिय मरन सेस ॥९४५॥ चहुवाँन आनि देख्यौ सु गेह । सिव बचन यादि कीनौ सु येह ॥ नृप सकल संग कौ सीख दीन । रावत्त राण मंत्रो प्रबीन ॥६४६॥ तुम जाहु जहाँ रतनेस आय । किज्जे न सोच नृपता बनाय ॥ चहुवाँन राय हम्मीर आय । हर मंदिर महँ प्रबिसंत जाय ॥९४७॥ करि पूजन भव⁷ गणपति मनाय । बहु धूप दीप आरति बनाय ॥ हो गिरजा गणपति सुमम देव । १ अग्गा । २ नाना । ३ उचाय । ४ अग्र । ५ हनी । ६ पानि । ७ बहु । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri