हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५८ हम्मीररासो जहँ राव हमीर सु लाय पगै ॥६३७॥ अब साहि सु राव कही तबहीं । तुम जाहु दिली न डरो अबहीं ॥ लखि साह कौ लोग मुरकि चल्यौ । नृप आप हमीर सु खेत मिल्यौ ॥९३८॥ वचनिका राव हम्मीर का उमरावाँ तरवारि कटारियाँ सों जुद्ध कियौ १ पातसाह का अमीर उमरावाँ सूं मल्ल जुद्ध करचौ २ तदि ३ पातसाह की फौज ४ बिकल होकर पातस्याह तैं छोड़ छोड़ भागी हम्मीर को रावताँ पातस्याह ने हाथी सुद्धां घेरि ल्याया ॥ हम्मीर के आगे ल्या खड़ो करचौ । राव हम्मीर पातसाह ने देखि आपणाँ रावताँ सों कही यानै छोड़ देओ यह ने पृथ्वीस कहै छै या अदंड [छै] ॥ यह सुनि पातसाह ने छोड़ दियौ ५ । पातसाह ने उह की फौज मैं पहुँचाय दियौ । पतसाह वहाँ से खेत छोड़ कूँच कियौ ६ ॥ दोहरा छंद छाड़ि खेत पतसाहू तब, परे ७ कोस द्वै जाय । हसम सकल चहुवाँन न, लीनौ ८ तबै छिनाय ॥९३६॥ लिये साह नीसाँन तब, बाना जिते बनाय । और सम्हारि सु खेत कौ, घायल सोधि उठाय ॥६४०॥ सब कै जतन कराय कै, देस काल सम आय । राव जीति गढ़ कौ चले, हर्ष न हृदय समाय ॥९४१॥ बिन ' जाने नृप हर्ष मैं, गए भूलि ९ यह बात । १ कीधौ । २ बादसाह का अमीर उमरावाँ सूं मल्ल जुद्ध करि छुरी कटारी सों रंजका कौ प्रहार करचौ । ३ सजीभूत । ४ सेन । ५ दीधौ । ६ कीधौ । ७ परिय । ८ लिन्नौ । ६ भुल्हि । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri