हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ४३ ) के लिये रात्रि, यती के लिये स्त्रियों का संग, दूसरे गुणों के लिये लोभ वैसे ही हम्मीर के लिये अप्रतिष्ठा और नाश का कारण यह एक व्यक्ति है। भोज ने कहा कि वह समय भी हम्मीर के विरुद्ध चढ़ाई करने के लिये अनुपयुक्त नहीं है। इस वर्ष चौहान प्रदेश में खूब अन्न हुआ है। यदि किसी प्रकार अलाउद्दीन उसे रखने के पहले ही किसानों से छीन सके तो वे जो कि अंधे व्यक्ति के अत्याचार से पहले ही से पीड़ित हैं, हम्मीर का पक्ष छोड़ने पर सम्मत हो सकते हैं। अलाउद्दीन को भोज का विचार पसंद आया और उसने तुरंत उलुगखाँ को एक लाख सवारों की सेना लेकर हम्मीर के देश पर आक्रमण करने की आज्ञा दी। उलुगखाँ की सेना एक प्रवल धारा के समान जिन प्रदेशों से होकर निकलती उनके अधिपतियों को नरकट के समान नवाती चली जाती। सेना इसी ढंग से हिंदावत पहुँच गई। तब उसके आने का समाचार हम्मीर तक पहुँचाया गया। इस पर उस हिंदू राजा ने एकसभा की और विचार किया कि किन उपायों का अवलंबन करना अच्छा होगा। यह निश्चय हुआ कि वीरम और राज्य का शेष आठ बड़े पदाधिकारी शत्रु से युद्ध करने जायँ। तुरंत राजा के सेनानायकों ने सेना को आठ भागों में विभक्त किया और आठों दिशाओं से आकर वे मुसलमानों पर टूट पड़े। वीरम पूर्व से आया और महिमासाह पश्चिम से। जाजदेव दक्षिण से और गर्भारूक उत्तर की ओर से बढ़ा। रतिपाल अग्निकोण से आया और तिचर मोगल ने वायुकोण से आक्रमण किया। रणमल ईशानकोण से आया और वैचर ने नैऋत्य की ओर से आकर आक्रमण किया। राजपूत लोग बड़े पराक्रम के साथ अपने कार्य में तत्पर हुए। उनमें से कई एक ने शत्रु की खाइयों को मिट्टी और कूड़े करकट से भर दिया, कई एक ने मुसलमानों के लकड़ी के घेरों में आग लगा दी। कुछ लोगों ने उनके डेरों (खेमों) की रस्सियों को काट डाला। मुसलमान लोग शस्त्र