हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६ हम्मीररासो द्वै पुत्र भए ताकै जु बीच ॥ इक भए प्रथम कस्यप सुजाँन । फिर उपजि धरम जहँ पूर्णमाँन ॥२६॥ भय कस्यप कै सूरज सु आय । सो भयौ वंस सूरज सुगाय ॥ अरु सुनो अत्रि कै पुत्र तीन । इक दत्त सोम जान्यौ प्रबीन ॥२७॥ ऋषि भए अपर दुरबास नाँम । सोइ¹ सुनो श्रवण तिहिं वंस जाँम ॥ सुत भयौ सोम कै बुद्ध आय । पुरुरवा पुत्र ताकै सुभाय ॥२८॥ षट पुत्र भए ताकै प्रसिद्ध । भए सोम वंस तिनकै जु सिद्ध ॥ भृगु वंस सुनो अतिसै उदार । चहुवाँन भए तिनतैं अपार ॥२९॥ इक ख्यात नाँम तिय अति अनूप । भय उभै पुत्र ताकै जु भूप ॥ इक कह्यौ प्रथम धाता जु नाँम । फिर भए विधाता धर्म-धाँम ॥३०॥ इक² अपर प्रिया भृगु कै कनिष्ठ । ए पुत्र भए ताकै प्रतिष्ठ ॥ भय सुक्र जेष्ठ गुरु-असुर जानि । तिहिं अनुज चिमन³ तप-पुंज मानि ॥३१॥ भृगु कै जु भए जग अति बिख्यात । जिहिं सुक्र नाम बल तेज तात ॥ १ सुई । २ एक । ३ च्यवन । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri