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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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पृष्ठ 96

१० हम्मीररासो जरतकार जाजुल्लिय परासुर परम पुनीतव । चिमन १ चाइसुर आइ, पिप्पलायनहिं, सुरचि २ सब ॥ बोटा अनेक बरनूँ किते, पंचसिखा पिक्खिय प्रगट । तप तेज पुंज झलहलत तहँ, दरसन तैं पातक सुघट ॥५१॥ सिद्धि औषधिय सकल, सकल ३ तीरथ जल आनिवं । जिते यज्ञ कै योग्य तिते, द्रव् ४ सब मन मानिव ॥ जजन ५ जानि ६ अध्याय होम ध्वनि होम सु उठ्ठे । सकल वेद कै मंत्र बिप्र मुख सुर जुत जुठ्ठे ७ ॥ ध्वनि सुनत असुर आए तुरत करन यज्ञ उच्छिष्ट थल । उत्पात अमित किन्ने ८ तबै तहाँ बृष्टि किन्निय ९ सबल ॥५२॥ पवन चलत परचंड घोर घन वारि सु वु(उ)ठ्ठे । रुहिर १० माँस तृण पत्र अगि ११ रज देखत उठ्ठे ॥ गए तहाँ बासिष्ट यज्ञ बहु बिघ्न सुनायौ । करै १२ प्रथम वध असुर होय तब यज्ञ सुभायौ ॥ बासिष्ट कुंड किन्हौ सुरुचि करन असुर र्निमल तब । धरि ध्याँन होम बेदी बिमल बेद मंत्र आहूति जब ॥५३॥ दोहरा छंद ऋषि वसीष्ठ बेदिय बिमल, साम बेद स्वर साधि । प्रगट कियउ क्षत्रिय पहुभि, बेदमंत्र आराधि ॥५४॥ तीन पुरुष उपजे तहाँ, चालुक प्रथम पँवार । दूजै तीजै ऊपजे, छत्र १३ जाति पहिहार १४ ॥ ५५ ॥ कियउ १५ जुद्ध अतुलित तिनहिं, नहिं खल जीते मूरि । १ च्यवन । २ सुरख्यिय । ३ सकल तीर्थनु जल आन्यौ, तित्यौदक आन्यौ । ४ द्रव्य तितने मत मानिव, दर्व्य जितने मन मान्यौँ । ५ यजन । ६ जाप । ७ वुठ्ठे । ८ कीने । ६ कीनी । १० रुधिर । ११ अग्नि । १२ करो । १३ चतुरजाति १४ पारिहार । १५ कियौ । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri