हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
पृष्ठ 119, कुल 548 में से
संदर्भ में पढ़ेंअ० १६ ] भाषाटीकासमेता । ( ८७ ) तिल पाककालमें मधुर है, अतिबलवाला है, चिकना है, घावपे लेप करनेमें पथ्य है, बलमें हित है, अग्निको और बुद्धिको देता है, सुंदर है, मूत्रके दोषको हरता है और भारी है॥२१॥ सब प्रकारके तिलोंमें काला तिल प्रधान है और सफेद तिल मध्यम है और अन्य प्रकारके तिल- हीन गुणवाले हैं ॥ २२ ॥ अथ चनाका गुण । रक्ते कफे पीनसके तु कण्ठे गलामये वातरुजे सपित्ते ॥शीतः प्रतिश्यायकृमीन्निहन्ति शुष्कस्तथार्द्रश्चणकः प्रशस्तः ॥ २३॥ रक्त, कफ, पीनस, कंठरोग, गलरोग, वातरोग और पित्त इनमें चना हित है, शीतल है, सखरमा और कीडोंको नाशता है, सूखे और गीले चने अच्छे कहे हैं ॥ २३ ॥ अथ उड़दका गुण । स्निग्धोऽथ वृष्यो मधुरश्च बल्यो मरुत्कफानां परिबृंहणश्च ॥ पाकेऽम्लकोष्णो विदितो हिमश्च माषोऽथ हृद्यः कथितो नरैश्च २४ उड़द चिकना है, वीर्यमें हित है, मधुर है, बलमें हित है, वायुको और कफको बढ़ाता है, पाककालमें खट्टा है, कुछ गरम है, शीतल और सुंदर है ॥ २४ ॥ अथ मूंगका गुण । शीतः कषायो मधुरो लघुः स्यात्पित्तास्रदोषस्य हरः सरश्च॥ विपाकतोऽसौ कटुकप्रधानो मुद्गस्तथान्यः कथितोऽभिरम्यः२५ मूँग शीतल है,मधुर है,हलका है,पित्त और रक्तके दोषको हरता है,सर है, पाककालमें चरचरा है और रमणीक है ॥ २५ ॥ अथ तुवरका गुण । मृदुः कषाया च सरक्तपित्तं वातं कफं हन्ति मुखव्रणञ्च ॥ गुल्मज्वरारोचककासछर्दिहृद्रोगदुर्नामहराढकी स्यात् ॥२६॥ तुवर अर्थात् अरहर कसैला है,कोमल है और रक्तपित्त,वात,कफ,मुखका घाव,गुल्म, ज्वर, अरोचक, खाँसी, छर्दि, हृद्रोग और बवासीर इनको हरती है ॥ २६ ॥ अथ मोठके गुण । स रक्तपित्तंकफवातहन्ता चोष्णः कषायो मधुरः प्रदिष्टः ॥ ग्राही सुशीतो गुदकीलगुल्मं मकुष्ठकः सर्वगदान्निहन्ति ॥२७॥ मोठ रक्तपित्त, कफ,और वात इनको नाशती है,गरम है,कसैला है,मधुर है, कब्जको करती है, शीतल है और बवासीर, गुल्म और सब रोगोंको हरती है ॥ २७ ॥