हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
पृष्ठ 124, कुल 548 में से
संदर्भ में पढ़ें( ९२ ) हारीतसंहिता । [ प्रथमस्थाने- अथ कुकडूके शाकका गुण । कलिङ्गं कफकृद्वातकरणं पित्तनाशनम् ॥ २० ॥ तरबूजका शाक कफको करता है, वातको हरता है और पित्तको नाशता है ॥ २० ॥ अथ करेलाका गुण । कारवेल्लश्च वातघ्नः कफघ्नः पित्तकारकः ॥ उष्णो रुचिकरः प्रोक्तो रक्तदोषकरो नृणाम् ॥ २१ ॥ करेला वातको नाशता है, कफको हरता है, पित्तको करता है, गरम है, रुचिको करता है और मनुष्योंके रक्तके दोषको करता है ॥ २१ ॥ अथ लालतूरीके पुष्पका गुण । पुष्पं तु चैर्भटं चैव दोषत्रयकरं स्मृतम् ॥ अपक्वं जीर्णकफकृत्पक्वं किंचिद्विशिष्यते ॥ २२ ॥ तूंबाका फूल त्रिदोषको करता है, नहीं पका हुआ अजीर्णको और कफको करता है और पकाहुआ कुछ विशेष अच्छा होजाता है ॥ २२ ॥ अथ तोरी, ककोडा, कडुई तोरीका गुण । तुण्डीरमग्निरुचिकृद्वातपित्तनिवारणम् ॥ कर्कोटकं त्रिदोषघ्नं रु- चिकृन्मधुरं तथा ॥ २३ ॥ कोशातकीफलं स्वादु मधुरं वातपि- त्तनुत् ॥ विपाके च कफं हन्ति ज्वरे शस्तं प्रदिश्यते ॥ २४ ॥ तोरी शाक अग्निको और रुचिको करता है, वातको और पित्तको दूर करता है । ककोड़ा त्रिदोषको नाशता है, रुचिको उपजाता है और मधुर है ॥ २३ ॥ कडुई तोरी स्वादु है, पाक- में मधुर है, वातको और पित्तको नाशती है, कफको हरती है और ज्वरमें श्रेष्ठ है ॥ २४ ॥ अथ परवलका गुण । पटोलपत्रं विनिहन्ति पित्तं नालं कफघ्नं प्रवदन्ति धीराः ॥ फलं च तस्यास्तु त्रिदोषशान्तिं करोति नूनं ज्वरिणो हितं स्यात् ॥२५॥ परवलका पत्ता पित्तको हरता है और परवलका नाल कफको नाशता है और परव- लका फल त्रिदोषको शांत करता है और ज्वरवालेको निश्चय हित है ( ये सब वेलियोंके शाक कहे )॥ २५ ॥ अथ बैंगनका गुण । निद्राकरं प्रीतिकरं गुरु स्यात्सवातलं कासविकारकारि ॥ श्रेष्ठं सुदीर्घं कफवर्धनं च सश्वासकासारुचिवर्धनं च ॥ २६ ॥ Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu