हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
पृष्ठ 127, कुल 548 में से
संदर्भ में पढ़ें.अ० १७] भाषाटीकासमेता । (९५) आम, जामुन, बेर, अनार, आमला, छुहारा अथवा खजूरिया, फालसा, बिजौरा, चिरौंजी ॥ १ ॥ नारंगी, अमली, दाख, करौंदा, खिरनी, सुन्दर खजूर फल ये सब फलवर्गमें कहे हैं ॥ २ ॥ अथ आमके फलका गुण । अपक्वमाम्रं फलमेव शस्तं संग्राहि पित्तासृजि कोपनं च ॥ तथा विपक्वं मधुरं च चाम्लं भेद्यं सपित्तामयनाशनं च ॥ ३ ॥ कुछेक पका हुआ आमका फल श्रेष्ठ है, कब्जको करता है, पित्तको और रक्तको कोपता है और विशेष पका हुआ आमका फल मधुर है, खट्टा है, दस्तावर है और पित्तके रोगको नाशता है ॥ ३ ॥ अथ जामन बेर अनार चिरौंजीके गुण । जम्बूग्राही मधुरकफहा रोचनो वातहारी कोलं चाम्लं मधुरम- थवा श्लेष्मलं ग्राहि शस्तम्॥ श्रेष्ठं वातादिकरुजहरं दाडिमं चा- मयघ्नं तत्प्रोक्तं च मधुरमुदितं स्वादु राजादनं च ॥ ४ ॥ जामुनका फल कब्जको करता है, मधुर है, कफको नाशता है, रुचिको करता है और वातको हरता है । बेर खट्टा है अथवा मधुर है, कफको करता है, कब्जको करता है, सुन्दर है । अनारका फल श्रेष्ठ है, वात आदिकी पीडाको हरता है और रोगको नाशता है । खिरना मधुर है और स्वादु कहा है ॥ ४ ॥ अथ विशेषवर्णन । परूषककरहपीलुकानां पियालसिंहीकरमर्दकानाम् ॥ फलानि मेहं विनिहंति पित्तं हन्याच्च सर्वार्तुरसंधिवातम्॥५॥ फालसा, करहा, पीलू, चिरौंजी, कटेली, करौंदी इनके फल प्रमेहको और पित्तको हरते हैं और रोगीके संपूर्ण शरीरके वातको हरते हैं ॥ ५ ॥ अथ बिजौराका गुण । स्यान्मातुलुङ्गः कफवातहंता हन्ता क्रिमीणां जठरामयघ्नः ॥ संदुष्टरक्तस्य विकारपित्तसंदीपनः शूलविकारहारी॥६॥ श्वास- कासारुचिहरं तृष्णाघ्नं कण्ठशोधनम् ॥ दीपनं लघु रुच्यं च मातुलुङ्गमुदाहृतम्॥७॥त्वक् तिक्ता दुर्जरा तिष्या क्रिमिवात- कफापहा ॥ स्वादु शीतं गुरु स्निग्धं करहं वातापित्तजित्॥८॥ मध्यं श्लेष्मातकं छर्दिकफारोचकनाशनम् ॥ दीपनं लघु संग्राहि गुल्मार्शो हन्ति केशरम्॥ ९ ॥ पित्तमारुतहद्धातपित्तलं बद्धकेश- १ छन्दोभंगः प्रथमचरणेऽस्य पद्यस्य ।