भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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अ० २१ ] भाषाटीकासमेता । (१०९) गौर तीतरोंमें गौर वर्णका तीतर श्रेष्ठ है ॥ ४ ॥ इन्हींके गुण और लक्षणोंके समान तीसरे, रंगका तीतर अन्य भी होता है परंतु वह वातल है, अतिबलको करता है, उसका मांस कठिन है और कुछ रसायन है ॥ ५ ॥ अथ नीले मोरके मांसका गुण । मेधावृद्धिं स्रोतसां च करोत्युत्पाटनं शिखी ॥ सवातलोऽतिबलकृद्धनः किञ्चिद्रसायनः ॥ ६ ॥ नीले मोरका मांस बुद्धिको बढ़ाता है और नाड़ियोंको शुद्ध करता है, वातल है, अतिब- लको करता है, कठिन है और कुछ रसायन है ॥ ६ ॥ अथ साधारण मोरके मांसका गुण । सुस्निग्धो श्लेष्मलो वृष्यो घनः शुक्रविवर्द्धनः॥ मांसवृद्धिकरो बल्यो द्वितीयश्च मयूरकः ॥७॥ साधारण मोरका मांस सुन्दर चिकना है, कफको करता है, वीर्यमें हित है, कठिन है, वीर्य- को बढ़ाता है, मांसको बढ़ाता है, बलमें हित है ॥ ७ ॥ अथ मुर्गाके मांसका गुण । तथैव कौक्कुटो ज्ञेयो मधुरश्च गुणात्मकः ॥८॥ वैसे ही मुर्गाका मांस भी मोरके मांसके समान गुणोंवाला है और मधुर है ॥ ८ ॥ अथ कपोतके मांसका गुण । कापोतो बृंहणो बल्यो वातपित्तविनाशनः ॥ तर्पणः शुक्रजननो हितो नृणां रुचिप्रदः ॥९॥ कपोतका मांस धातुओंको पुष्ट करता है, बलमें हित है, वातको और पित्तको नाशता है, तृप्तिको करता है, वीर्यको बढ़ाता है और मनुष्योंको हित है, रुचिको देता है ॥ ९ ॥ अथ परेवाके मांसका गुण । तथा पारावतो ज्ञेयो वातश्लेष्मकरो गुरुः॥बल्यो वृष्यो रुचिकृच्च तथा हारीतको मतः ॥ १० ॥ पोतकी भङ्गिका क्षुद्रा तथा च कुनटी तथा ॥ एते तुल्यगुणा ज्ञेया लघुवातापहारिणः ॥११॥ परेवाका मांस वातको और कफको करता है, भारी है, बलमें हित है, वीर्यमें हित है, रुचिको करता है और ऐसे ही गुणोंवाला तिलजिरुपक्षीका मांस है ॥ १० ॥ और पोतक, इन्द्रगोप, मधुमाखी, कुनटी इन चारोंका मांस समान गुणोंवाला है, हल्का है और वातको हरता है॥ ११ ॥ अथ ककेराके मांसका गुण । लघुश्च कृकरो ज्ञेयः कायाग्निवर्द्धनो भृशम् ॥ १२ ॥ ककेराका मांस हलका है, शरीरकी अग्निको बढ़ाता है ॥ १२ ॥