हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
पृष्ठ 144, कुल 548 में से
संदर्भ में पढ़ें( ११२ ) हारीतसंहिता । [ प्रथमस्थाने- .अथ मच्छके मांसका गुण । शृङ्गी वातविनाशनो रुचिकरो वृष्यः कफघ्नो मतस्तस्माद्रोहित- को हितो बलकरो वातात्मकः श्लेष्मकः ॥ ४ ॥ श्लेष्माकरी तु शफरी नलमीनः कफात्मकः ॥ शकुली च विशाला च ज्ञेयौ वातकफात्मकौ॥बिलं विमत्स्यं ज्ञेयं च वातपित्तकफाकरम्॥५॥ शृङ्गी मछलीका मांस वातको नाश करता है, रुचिकर है,वीर्यमें हित है और कफको नाश करनेवाला माना गया है। रोहू मछलीका मांस शृङ्गीसे अधिकहित करनेवाला है,बल करता है, वात प्रकृतिवाला है और कफको बढ़ाता है ॥४॥ शफरी मछली कफ करती है, नल मछली कफ प्रकृतिवाली है, शकुली मछली वातप्रकृतिवाली है, विशाला मछलीका मांस कफस्वभाव वाला है, बिल और विमत्स्य नामक मछलीका मांस वात, पित्त,कफ इन तीनोंको करता है॥५॥ अथ कछुवाके मांसका गुण । कच्छपो मधुरः स्वादुःशुक्रवृद्धिकरो मतः ॥ वातश्लेष्मप्रजननो बृंहणो रूक्ष एव च ॥ ६ ॥ कछुवेका मांस मधुर है, स्वादु है, वीर्यको बढ़ाता है ,वात और कफको उपजाता है, धातु- ओंको पुष्ट करता है और रूखा है ॥ ६ ॥ अथ केकड़ाके मांसका गुण । कुलीरोऽतिबलो वृष्यः पाण्डुक्षयविनाशनः ॥ शोफातिसारग्रहणीस्थविराणां स्त्रियां हितः ॥ ७ ॥ केकड़ाका मांस अधिक बलको करता है वीर्यमें हित है,पाण्डु और क्षय रोगको नाश करता है और शोजा,अतीसार,संग्रहणी दोष,इनसे पीडित और बूढे और स्त्रियोंको हित है ॥ ७ ॥ अथ मांसविशेषता । मकरो दीपनो हृद्यो ग्राही चोष्णविकारहा ॥ मूत्राश्मरीणां शमनो गुल्मातीसारनाशनः ॥ ८ ॥ मकर मच्छका मांस अग्निको जगाता है, सुन्दर है, कब्जको करता है, गरम विकारको ना- शता है, मूत्ररोग और पथरीको शांत करता है, गुल्म और अतीसारको नाशता है ॥ ८ ॥ अथ वर्जनाय मांसका गुण । काकश्येनखगारिसारसशुका यूकाः कलिङ्गा बकाः । भल्लूकोष्ट्रवराहधेनुतनयव्यालास्तथा गर्दभाः ॥ १ अस्मिन् श्लोके शार्दूलविक्रीडितस्य चरणद्वयमेवास्ति ।