हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअ० २२ ] भाषाटीकासमेता । ( १११ ) द्वाविंशोऽध्यायः २२.
अथ जलचरोंका मांसवर्ग । प्रथम हंस आदि जलके पक्षियोंकें मांसका गुण । हंसः श्लेष्मकरो बलातिरुचिदो वृष्योगुरुः शीतलस्त द्वत्कण्ठ सु- जाड्यशुक्रजननो वृष्योऽतिरुच्यो मृदुः ॥ ज्ञेयः सारसकः कफा- निलहरो वृष्यो गुरुश्चोच्यते वृष्यो वीर्यविवर्द्धनः कफहरः कङ्क- स्तथा भासकः ॥ १ ॥ हंसका मांस कफको करता है, बलको और अति रुचिको देता है, वीर्यमें हित है, भारी है और शीतल है । और सारसका मांस हंसके मांसके समान गुणोंवाला है, कंठमें जडपनेको और वीर्यको करता है, वीर्यमें हित है, रुचिमें हित है और कोमल है, और कंक पक्षीका मांस कफ- को और वातको हरता है, वीर्यमें हित है और भारी है और भासपक्षीका मांस वीर्यमें हित है और वीर्यको बढ़ाता है, कफको नाशता है ॥ १ ॥ आडी आदि पक्षीक मांसका गुण । आडी वातविकारकासहननी बल्या वृषा दीपनी क्रौञ्ची चासुरि- शुक्रदोषहननी तुल्यस्तथा कर्कटः ॥ दात्यूहो मरुतस्यनाश- नकरो वृष्यो बलः शुक्रदश्चैष श्रेष्ठगुणः श्रमोपशमनः शुक्रप्रदो वातहा ॥ २ ॥ आड़ीका मांस, बातका विकार और खाँसीको हरता है, बलमें और वीर्यमें हित है और अग्निको जगाता है । क्रौंचका मांस और आसुरीका मांस वीर्यके दोषको हरता है, और इसीके समान गुणोंवाला कांकडपक्षीका मांस है और करढोंक पक्षीका मांस वातको नाशता है, वीर्यमें हित है, बलको और वीर्यको देता है और यह श्रेष्ठ गुणोंवाला है, परिश्रमको शांत करता है॥२॥ अथ मकर मच्छके मांसका गुण । मत्स्यानां मकरः श्रेष्ठो दीपनो वातनाशनः ॥ रुचिप्रदः शुक्रकरश्चाश्मरीदोषनाशनः ॥ ३ ॥ सब प्रकारके मच्छोंके मांसोंमें मकरमच्छका मांस श्रेष्ठ है, अग्निको जगाता है,वातको नाशता- है, रुचिको देता है, वीर्यको करता है और पथरीदोषको नाशता है ॥ ३ ॥