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हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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( १५८ ) हारीतसंहिता । [द्वितीयस्थाने- दूत रोगियोंके रोगको नाशनेके लिये शुभ कहा है ॥ १५ ॥ जो पूर्वदिशामें आश्रित होके प्रशांत हुआ दूत शांतवाणीसे वैद्यको बोलता है वह दूत वैद्यको सुखका देनेवाला कहा है॥१६॥ जो आर्के श्लोकको अथवा सुन्दर वचनको शांतवाणीसे बोले वह भी दूत शुभ कहा है ॥१७॥ जो दूत वैद्यको प्रणामकर फिर कुशलको पूँछ फलको अथवा फूलको देता है वह रोगियोंके सुखका देनेवाला है ॥ १८ ॥ अथ दूतलक्षणोंका उपसंहार । यस्य सौख्यं सुखं सिद्धिस्तस्य दूता इदं विदुः॥किमत्र बहुनो- क्तेन दूतो नरसुखावहः ॥ १९ ॥ न हितमस्त्रीपुरुषं तस्मात्तु परिवर्जयेत् ॥ एवं जानाति यो वैद्यस्तस्य सिद्धिः सुखं श्रियः ॥ २० ॥ इति आत्रेयभाषिते हारीतोत्तरे द्वितीयस्थाने दूतपरी- क्षणलक्षणं नाम अष्टमोऽध्यायः ॥ ८ ॥ जिस रोगीको सुख और सिद्धिकी प्राप्ति होनेवाली है उसके दूत इस पूर्वोक्त वचनको बोलते हैं ज्यादे कहनेसे क्या है दूतही मनुष्योंको सुखका देनेवाला है ॥ १९ ॥ हीजडा दूत कर्ममें हित नहीं है इससे इसको वर्जे ऐसा जो वैद्य जानता है उसको सिद्धि, सुख, लक्ष्मी इनकी प्राप्ति होती है ॥ २० ॥ इति वेरीनिवासिबुधशिवसहायसूनुवैद्यरविदत्तशास्त्र्यनुवादितहारीतसंहिता- भाषाटीकायां द्वितीयस्थाने दूतपरीक्षालक्षणं नाम अष्टमोऽध्यायः ॥ ८ ॥ नवमोऽध्यायः ९. —<०>— अथ शकुनवर्णन ! आत्रेय उवाच ॥ इदानीं निर्गमे पुत्र प्रवेशे वा गृहस्य च ॥ शुभाशुभानि सर्वाणि वक्ष्यामि शकुनानि च ॥ १ ॥ आत्रेयजी कहते हैं-हे पुत्र ! अब वैद्यके चलनेमें और रोगीके घरमें प्रवेश करनेमें शुभ और अशुभ जो शकुन हैं उनको कहता हूं ॥ १ ॥ अथ शुभ शकुन । राजा गजो द्विजमयूरकरखञ्जरीटाश्वाषः शकुन्तरजकः सितवस्त्र- युक्तः ॥ पुत्रान्विता च युवती गणिका च कन्या श्रेयः सुखाय यशसे प्रतिदर्शयन्ति॥२॥ लङ्गा श्येनो भासहारीतचक्रो भार-