हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १६८ ) हारीतसंहिता । तृतीयस्थाने- अथ सात प्रकारके क्वाथ । पाचनो दीपनीयश्च शोधनः शमनस्तथा ॥ तर्पणः क्लेदनः शोषी क्वाथः सप्तविधः स्मृतः ॥ ४७ ॥ पाचन, दीपन, शोधन ,शमन, तर्पण, क्लेदन,शोषण ऐसे सातप्रकारके क्वाथ कहे ॥४७॥ अथ सातप्रकारके क्वाथोंका लक्षण । पाचनोऽर्द्धावशेषी स्याच्छोधनो द्वादशांशकः॥क्लेदनश्चतुरङ्गश्च शमनोऽष्टावशेषितः ॥ ४८ ॥ दीपनीयो दशांशस्तु तर्पणश्च समांशकः॥विशोषी षोडशांशश्च क्वाथभेदाः प्रकीर्त्तिताः४९॥ अग्निसे उबालनेमें आधा शेष रहा पानी पाचनक्वाथ कहाता है और जिसमें बारहवाँ हिस्सा पानी शेष रहे वह शोधन कहाता है, जिसमें चौथा हिस्सा पानी शेष रहे वह क्लेदन कहाता है, जिसमें आठवां हिस्सा पानी शेष रहे, वह शमन कहाता है ॥ ४८॥ जिसमें दशवां हिस्सा पानी शेष रहे वह दीपन कहाता है, जो उवाला मात्र जावे वह तर्पण कहाता है जिसमें सोलहवां हिस्सा पानी शेष रहे वह शोषण कहाता है, ऐसे क्वाथके भेद कहे हैं ॥४९ ॥ अथ सात प्रकारक क्वाथोंका कार्य । पाचनः पचते दोषान्दीपनो दीप्यतेऽनलम्॥शोधनो मलशोधी स्याच्छमनः शमते गदान् ॥ ५० ॥ तर्पणस्तर्पयत धातून्क्लेदी हृत्क्लेदकारकः॥विशोषी शोषमाधत्ते तस्मात्क्वाथं परीक्षयेत्॥ ॥ ५१ ॥ क्लेदी विशोषी विज्ञाय वामनं कारयेन्नरम् ॥ पाचनक्वाथ दोषोंको पकाता है, दीपनक्वाथ जठराग्निको प्रज्वलित करता है, शोधनक्वाथ मलको शोधता है, शमनक्वाथ रोगोंको शांत करता है ॥५० ॥ तर्पणक्वाथ धातुओंको तृप्त करता है, क्लेदनक्वाथ हृदयमें क्लेदको करता है, शोषणक्वाथ शोषको करता है, इसवास्ते क्वाथकी परीक्षा करनी ॥ ५१ ॥ मनुष्यको क्लेदवाला और विशेषकरके शोषवाला जानके वमन कराना चाहिये । अथ क्वाथरक्षणका उपदेश । न लङ्घयेत्क्वाथकृतं नान्तराणि च चालयेत्॥५२॥न शोषये- त्पुनः स्थाप्यो नाशुचौ न चकासते॥ स च क्वाथो न शस्तः स्याद्रोगसङ्करकारणम् ॥ ५३ ॥ न शोषयेत्पुनः क्वाथं न च भूमिगत पुनः ॥ दोषसंशमनेनैते प्रशस्ता गदकर्मणि ॥५४ ॥ Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu