हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १८६ ) हारीतसंहिता । [ तृतीयस्थाने- पिप्पलादि गणके औषधोंका कल्क कफके ज्वरमें सुंदर पाचन है ॥ ७९ ॥ अथ व्याघ्यादिकल्क । तद्वद्याघ्री च सिंही च रोध्रं कुष्ठपटोलकम् ॥ ज्वरे कफात्मजे चैतत्पाचनं स्यात्तदुत्तमम् ॥ ८० ॥ छोटी कटेली, बड़ी भटकटैया, लोध, कूट, परवल, इनका पाचन कफज्वरमें हित है॥८०॥ अथ वासादिक्वाथ । वासा गुडूची त्रिफला पटोली शटी च तिक्ता मधुनीकषायम्॥ श्लेष्मप्रभूतेषु रुजेषु सम्यग् ज्वरं निहन्यात्कफजञ्च शीघ्रम्॥८१॥ वांसा, गिलोय, हरड़, बहेड़ा, आंवला, परवल, कचूर, कुटकी, इनके क्वाथमें शहद मिला- कर श्लेष्मासे उत्पन्न होनेवाले रोगोंमें पीवे यह कफके ज्वरको शीघ्र नाशता है ॥ ८१ ॥ अथ आमलक्यादिक्वाथ । आमलक्यभया कृष्णा षड्ग्रन्था त्रित्रिकन्तथा ॥ मलभेदी कफान्तको ज्वरनाशनदीपनः ॥ ८२ ॥ आमला, हरडै, पीपल, वच, सोंठ, मिर्च, पीपल, हरडे, बहेडा, आंवला और दालचिनी, इलायची, तेजपात, इनका क्वाथ मलको पतला करता है कफको हरता है ज्वरको नाशता है और अग्निको जगाता है ॥ ८२ ॥ अथ पिप्पल्यादिक्वाथ । पिप्पली शृङ्गवेरञ्च षड्ग्रन्था वत्सकं फलम् ॥ क्वाथो मधुप्रगाढः स्याच्छ्लेष्मज्वरविनाशनः ॥ ८३ ॥ पीपल, अदरख, वच, इंद्रयव, इन्होंका क्वाथ बना तिसमें शहद मिला पीनेसे कफज्वरका नाश होता है ॥ ८३ ॥ अथ पिप्पलीका अवलेह । क्षौद्रेण पिप्पलीचूर्णं लिह्येच्छ्लेष्मज्वरापहम् ॥ प्लीहानाहविषं हन्ति कासश्वासाममर्द्दनम् ॥ ८४ ॥ पीपलके चूर्णको शहदमें मिला चाटनेसे कफज्वर, तिल्लीरोग, अफारा, विष, खांसी, श्वासरोग, आम, इनका नाश होता है ॥ ८४ ॥ अथ वातपित्तज्वरका निदान और चिकित्सा । तृष्णा मूर्च्छा वमन कटुता चानने रूक्षता स्यादन्तर्दाहो वपुषि Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu